नदियों की सफाई पर प्रशासन सख्त, क्षिप्रा और कान्ह में अशोधित औद्योगिक अपशिष्ट बहाने पर 9 कारखाने सील

इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र से निकलने वाली क्षिप्रा उज्जैन पहुंचती है जहां हर 12 साल में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालु इस नदी में स्नान करते हैं. क्षिप्रा को हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं में 'मोक्षदायिनी' कहा जाता है.

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नदियों की सफाई को लेकर प्रशासन सख्त

Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) जिले में क्षिप्रा समेत दो नदियों में अशोधित औद्योगिक अपशिष्ट बहाने पर बुधवार को प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नौ कारखानों को सील कर दिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Dr Mohan Yadav) के निर्देशों के अनुसार क्षिप्रा नदी (Kshipra River) को उज्जैन में 2028 में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले प्रदूषणमुक्त करने की मुहिम के तहत पालदा, सांवेर रोड, बरदरी और लक्ष्मीबाई नगर स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में यह कार्रवाई की गई.

उन्होंने बताया कि इन औद्योगिक क्षेत्रों के नौ कारखाने अपशिष्ट को अशोधित तरीके से ही क्षिप्रा और कान्ह नदियों में बहा रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि इन कारखानों के बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं और उन्हें सील कर दिया गया है.

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हर 12 साल में लगता है सिंहस्थ कुंभ मेला

इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र से निकलने वाली क्षिप्रा उज्जैन पहुंचती है जहां हर 12 साल में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालु इस नदी में स्नान करते हैं. क्षिप्रा को हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं में 'मोक्षदायिनी' कहा जाता है. अधिकारियों ने बताया कि इंदौर में गंदे नाले में तब्दील कान्ह नदी का पानी भी क्षिप्रा में मिलता है और इसमें होने वाले प्रदूषण में इजाफा करता है.

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आचमन के लायक नहीं क्षिप्रा का जल

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी प्रदूषण के कारण क्षिप्रा नदी का पानी उज्जैन में आचमन के लायक नहीं है. मुख्यमंत्री डॉ यादव ने 7 जनवरी को उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह और देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता की क्षिप्रा शुद्धिकरण को लेकर बैठक ली थी. शासन ने क्षिप्रा स्वच्छ करने के लिए 600 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए, जिसके बाद प्रशासन जुट गया है.