महाकाल मंदिर VIP दर्शन विवाद: विरोध करने वाले संगठन खुद घिरे, 6 माह में 11,568 प्रोटोकॉल दर्शन कराने का दावा

उज्जैन के महाकाल मंदिर में VIP दर्शन को लेकर विवाद गहराया. मंदिर समिति का दावा, VHP और बजरंग दल की अनुशंसा पर 6 माह में 11,568 प्रोटोकॉल दर्शन और 2,068 भस्म आरती कराई गई.

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महाकाल में VIP दर्शन विवाद: बजरंग दल-VHP के प्रदर्शन के बाद मंदिर समिति का पलटवार

Mahakal VIP Darshan Controversy: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. एक ओर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने वीआईपी कल्चर के खिलाफ प्रदर्शन कर आम श्रद्धालुओं को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया, तो दूसरी ओर मंदिर प्रबंधन ने ऐसे आंकड़े जारी किए हैं, जिन्होंने प्रदर्शनकारी संगठनों को ही सवालों के घेरे में ला दिया है. मंदिर समिति का दावा है कि बीते छह महीनों में इन संगठनों के पदाधिकारियों की अनुशंसा पर हजारों लोगों को प्रोटोकॉल के तहत दर्शन और भस्म आरती करवाई गई. इसके बाद मंदिर में वीआईपी व्यवस्था को लेकर बहस और तेज हो गई है.

VIP दर्शन व्यवस्था के खिलाफ हुआ प्रदर्शन

मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाकाल मंदिर के शंख द्वार पर धरना देकर वीआईपी दर्शन व्यवस्था का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वीआईपी कल्चर के कारण सामान्य श्रद्धालुओं को घंटों तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है. संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि भस्म आरती और शीघ्र दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा.

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मंदिर समिति ने जारी किए आंकड़े

प्रदर्शन के बाद मंदिर समिति ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा कराए गए प्रोटोकॉल दर्शनों का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिया. समिति के अनुसार, पिछले छह महीनों में इन संगठनों की अनुशंसा पर 11,568 श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल के तहत दर्शन कराए गए, जबकि 2,068 लोगों को भस्म आरती में शामिल कराया गया. मंदिर प्रशासन का दावा है कि इससे मंदिर को लगभग 29 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ.

श्रद्धालुओं के बीच समान व्यवस्था की मांग

मामले के सामने आने के बाद कई श्रद्धालुओं ने मंदिर में सभी के लिए एक समान दर्शन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि चाहे कोई भी संगठन या व्यक्ति हो, दर्शन व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता होनी चाहिए. श्रद्धालुओं का मानना है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर विशेष व्यवस्थाओं और आम श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.

मंदिर प्रशासन ने दिया जवाब

महाकाल मंदिर समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने कहा कि मंदिर में कुछ संगठनों द्वारा ज्ञापन दिया गया है, जिसमें प्रोटोकॉल और शीघ्र दर्शन व्यवस्था को लेकर सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. साथ ही, विभिन्न संवैधानिक, प्रशासनिक और प्रतिष्ठित पदों पर आसीन व्यक्तियों को निर्धारित नियमों के तहत प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा दी जाती है.

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