मध्य प्रदेश ATS ने पकड़ा 'लोन-वुल्फ' आतंकी मोहम्मद फराज, पाकिस्तान-अफगानिस्तान से जुड़े तार

मध्य प्रदेश एटीएस ने भोपाल के काजी कैंप इलाके से मोहम्मद फराज नाम के एक 35 वर्षीय संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. आरोपी विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था और 'लोन-वुल्फ' हमले की तैयारी कर रहा था.  कोर्ट ने उसे 16 जून तक एटीएस रिमांड पर भेज दिया है.

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इस वक्त की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. राज्य के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने एक बेहद गुप्त ऑपरेशन के तहत भोपाल के काजी कैंप इलाके से 35 वर्षीय एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहम्मद फराज के रूप में हुई है. खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, फराज विदेशी आकाओं के इशारे पर भारत में किसी बड़े 'लोन-वुल्फ' (अकेले दम पर हमला करना) हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहा था.

नन्हें मियां की मस्जिद के पास से दबोचा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एटीएस ने इस पूरी कार्रवाई को इतनी गोपनीयता से अंजाम दिया कि स्थानीय पुलिस थाने और वरिष्ठ अधिकारियों तक को इसकी कानों-कान खबर नहीं हुई. फराज को पुराने भोपाल के नन्हें मियां की मस्जिद के पास से दबोचा गया.

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मोबाइल में मिला पाकिस्तानी जिहादी लिटरेचर, ले रहा था मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग 

जांच में सामने आया है कि आरोपी मोहम्मद फराज पूरी तरह से कट्टरपंथ के जाल में फंस चुका था और वह इंटरनेट के जरिए विदेशी चरमपंथी सामग्री का लगातार सेवन कर रहा था.

  • डिजिटल सबूत: एटीएस को उसके मोबाइल फोन से एक पीडीएफ (PDF) फाइल मिली है, जिसमें कथित तौर पर पाकिस्तान से भेजा गया जिहादी लिटरेचर है.
  • फिजिकल तैयारी: सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि फराज विशेष ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की फिराक में था. वह खुद को शारीरिक रूप से मजबूत करने के लिए मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग भी ले रहा था, ताकि किसी हिंसक वारदात को अंजाम दे सके.

क्या होता है 'लोन-वुल्फ' मॉडल?

सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह गिरफ्तारी इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि फराज 'लोन-वुल्फ' मॉडल पर काम कर रहा था. इस मॉडल में कोई भी व्यक्ति किसी बड़े आतंकी संगठन या स्थानीय नेटवर्क से सीधे जुड़े बिना, इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन रेडिकलाइज होता है और दूर बैठे हैंडलर्स के इशारे पर अकेले ही हमले को अंजाम दे देता है.

UAPA के तहत मामला दर्ज, डार्क एप्स और देवबंद कनेक्शन की जांच

एक डॉक्टर के क्लिनिक में काम करने वाले फराज को विशेष अदालत ने 16 जून तक एटीएस की रिमांड पर भेज दिया है. एटीएस ने उसके खिलाफ यूएपीए और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़ी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.

जांच एजेंसियां अब फराज के डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाल रही हैं. शुरुआती जांच में पता चला है कि वह कुछ 'डार्क ऐप्स' के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था. सोशल मीडिया पर उसके द्वारा गाजा के समर्थन में किए गए कुछ आपत्तिजनक कमेंट्स और चैट्स की भी कड़ाई से जांच की जा रही है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के देवबंद की एक मदरसे से भी उसके संपर्क होने के सुराग मिले हैं, जिसकी पुष्टि की जा रही है.

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फिलहाल, मध्य प्रदेश एटीएस इस पूरे मामले में तीन मुख्य सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है.

  1. फराज को सीमा पार से कौन गाइड कर रहा था?
  2. क्या मध्य प्रदेश या देश के किसी अन्य हिस्से में उसके स्थानीय मददगार सक्रिय हैं?
  3. वह अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के कितने करीब था?
     

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