"....सुप्रीम कोर्ट तो सुप्रीम कहलाने लायक नहीं" मौलाना मदनी के बयान से देशभर में बवाल, ऐसी हैं प्रतिक्रिया

Maulana Mahmood Madani Controversy: अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के बयान पर कहा, "जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने जो बयान दिया है, उससे मैं ही नहीं बल्कि भारत के करोड़ों मुसलमान इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

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Maulana Mahmood Madani: जिहाद पर मौलाना मदनी का विवादित बयान

Maulana Mahmood Madani Controversial Statement: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान पर विवाद शुरू हो गया है. मौलाना महमूद मदनी ने अपने बयान में देश के वर्तमान हालातों को बहुत संवेदनशील और चिंताजनक बताया. उन्होंने यह भी आरोप लगाए कि एक खास समुदाय को जबरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है. महमूद मदनी ने यह भी कहा कि जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा. इसके साथ ही मौलाना ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. जिसका देशभर में विरोध हो रहा है.

पहले जानिए मौलाना ने क्या कुछ कहा?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय शासी निकाय की बैठक में इसके अध्यक्ष, मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "देश के मौजूदा हालात बहुत संवेदनशील और चिंताजनक हैं. दुख की बात है कि एक खास समुदाय को जबरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है, दूसरे समुदाय कानूनी तौर पर बेबस, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेइज्जत किए जाते हैं. बुलडोज़र एक्शन, मॉब लिंचिंग, वक्फ संपत्ति पर कब्ज़ा और धार्मिक मदरसों और सुधारों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि उनके धर्म, पहचान और वजूद को कमज़ोर किया जा सके...इससे मुसलमान सड़कों पर चलते हुए भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं..."

जिहाद पर बयान

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने 'जिहाद' को गाली, झगड़े और हिंसा का मतलब बना दिया है. लव जिहाद, लैंड जिहाद, 'तालीम' जिहाद, 'थूक' जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुसलमानों की आस्था का अपमान करने के लिए किया जाता है. यह दुख की बात है कि सरकार और मीडिया में ज़िम्मेदार लोगों को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में कोई शर्म नहीं आती... इस्लाम में, कुरान में 'जिहाद' का इस्तेमाल कई तरह से किया गया है. इसका इस्तेमाल किसी के फ़र्ज़, समाज और इंसानियत की भलाई के लिए किया गया है. जब इसका इस्तेमाल जंग के लिए किया गया है, तो इसका इस्तेमाल ज़ुल्म और हिंसा को खत्म करने के लिए किया गया है. इस्लिए जब जब ज़ुल्म होगा तब तब जिहाद होगा." 

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वंदे मातरम पर सवाल

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "...'मुर्दा कौम' मुश्किलों में नहीं पड़ते. वे समर्पण कर देते हैं. उनसे वंदे मातरम पढ़ने को कहा जाएगा और वे तुरंत ऐसा करना शुरू कर देंगे. यही 'मुर्दा कौम' की पहचान है. अगर यह 'ज़िंदा कौम' है, तो हौसला बढ़ाना होगा और हालात का डटकर सामना करना होगा..."

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सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी

मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "...बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और कई दूसरे मामलों में फैसले के बाद, ऐसा लगता है कि कोर्ट कुछ सालों से सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं...हमारे पास पहले भी कई ऐसे उदाहरण हैं जिनसे कोर्ट के चरित्र पर सवाल उठे हैं...सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम कहलाने के लायक है जब वह संविधान को माने और कानून को बनाए रखे. अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो वह 'सुप्रीम' कहलाने के लायक नहीं है."

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मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "देश के संविधान ने हमें धर्म की आज़ादी का अधिकार दिया है. लेकिन धर्म बदलने के कानून के ज़रिए इस बुनियादी अधिकार को खत्म किया जा रहा है. इस कानून का इस्तेमाल इस तरह से किया जा रहा है कि किसी धर्म को मानने वाले को डर और सज़ा का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ, 'घर वापसी' के नाम पर लोगों को किसी खास धर्म में शामिल करने वालों को खुली छूट है. उनसे कोई पूछताछ नहीं होती, और न ही उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होती है..."

पात्रा का पलटवार

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा, "जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने आज भोपाल में एक बड़ी बैठक में जिस प्रकार का बयान दिया है, वह न केवल भड़काऊ है अपितु देश को विभाजन की ओर ले जाने की उनकी कुचेष्टा है. उनका कहना कि 'जिहाद' होना चाहिए, 'जब-जब जुल्म होगा जिहाद होगा', मुझे लगता है कि ये काफी अनुचित वाक्य है. जिहाद के नाम पर जिस प्रकार से लोगों ने भारतवर्ष और भारतवर्ष के बाहर आतंक फैलाया है वो भी हमने देखा है तो स्वाभाविक रूप से ये कहना कि भारत में जिहाद होगा, यह बहुत ही गैर जिम्मेदाराना बयान है... उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के दबाव में काम करता है और इस देश में उसे 'सुप्रीम' कहलाने का कोई अधिकार नहीं है. मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि इससे कोर्ट की हैसियत कम होती है..." 

पात्रा ने कहा कि "मौलाना मदनी ने भाषण में कहा कि मरी हुई कौमें झुकती हैं, जिंदा कौमें नहीं झुकतीं और विरोध करती हैं. उन्होंने वंदे मातरम् को जबरन कहलवाने का आरोप भी लगाया. मैं मौलाना मदनी को याद दिलाना चाहता हूँ कि वंदे मातरम् किसी धर्म का नहीं, हमारी मातृभूमि का सम्मान है, जिसके लिए अनगिनत वीरों ने अपना बलिदान दिया है."

मदनी के बयान से भारत के करोड़ों मुसलमान इत्तेफाक नहीं रखते : शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी

अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के बयान पर कहा, "जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने जो बयान दिया है, उससे मैं ही नहीं बल्कि भारत के करोड़ों मुसलमान इत्तेफाक नहीं रखते हैं. मौलाना महमूद मदनी मजहबी आदमी हैं, उन्हें मजहब के ताल्लुक से बात करनी चाहिए, उन्हें भड़काऊ बयानबाजी नहीं करनी चाहिए... करोड़ों मुसलमान सुप्रीम कोर्ट और संसद जैसी संस्थाओं पर भरोसा करते हैं... ये सभी संस्थान लोगों या धर्म के खिलाफ फैसले नहीं करते... मौलाना मदनी साहब हिंदुस्तान में मुसलमान और हिंदू के बीच जो भाईचारा है उसे खत्म करना चाहते हैं. भारत का मुसलमान अमन और शांति के साथ रहता है... ये शांति मौलाना मदनी को रास नहीं आ रही है.

भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के बयान पर कहा, "जमीयत उलेमा-ए-हिंद की आज कोई प्रासंगिकता नहीं रही है, अपने आप को सुर्खियों में लाने के लिए वे इस तरह की बातें कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट पर उन्होंने जिस तरह टिप्पणी की है वह न्यायालय की अवमानना के तहत आता है, इसपर स्वतः संज्ञान लेते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए..."

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान पर कहा, "दुनिया का सबसे सुरक्षित देश, खासकर मुस्लिम समाज के लिए भारत है. कुछ लोग हैं, जो जहां खाते हैं, उसी थाली में छेद करते हैं..."

महमूद मदनी के बयान पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "ये सभी बयान भारत के राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, न्याय व्यवस्था, शासन और प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती हैं. वे अपने ही मुस्लिम समुदाय के युवाओं और कट्टर मुस्लिम कट्टरपंथियों को जिहाद के नाम पर भड़का रहे हैं."

विनोद बंसल ने कहा, "महमूद मदनी को बताना चाहिए कि दिल्ली ब्लास्ट में शामिल डॉक्टर उमर पर कौन-सा अन्याय हुआ. जितने भी आतंकवादी भारत और भारत के बाहर पकड़े गए हैं, क्या उन सभी के साथ जुर्म हुआ? महमूद मदनी सीधे कहें कि वे आतंकवादियों के साथ खड़े हैं." उन्होंने मांग उठाई कि महमूद मदनी के खिलाफ शासन-प्रशासन को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए. इसके साथ ही, वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे कट्टरपंथी मौलानाओं से दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि यही एक दिन उन्हें आरडीएक्स बांधकर ब्लास्ट करने के लिए मजबूर कर देंगे.

वहीं, अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने मौलाना महमूद मदनी के बयान पर पलटवार किया. उन्होंने महमूद मदनी की सोच को गलत ठहराया और कहा कि ऐसे लोग चाहते हैं कि भारत एक इस्लामिक देश बने.

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