जबलपुर में रैगिंग के दोषी MBBS के 8 सीनियर्स पर सख्त एक्शन ! 6 माह के लिए निलंबित, एंट्री पर भी बैन

Jabalpur Medical College Ragging: जबलपुर के NSCB मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई हुई है. 8 सीनियर MBBS छात्रों को 6 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है और कॉलेज व हॉस्टल में उनकी एंट्री बैन कर दी गई है.

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Jabalpur MBBS Seniors Suspended: जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस (NSCB) मेडिकल कॉलेज से रैगिंग के खिलाफ नजीर पेश करने वाली कार्रवाई सामने आई है.कॉलेज प्रबंधन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एमबीबीएस 2023 बैच के आठ छात्रों को न केवल छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है, बल्कि उन पर भारी आर्थिक जुर्माना भी ठोका है. एनडीटीवी के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने जानकारी मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर एक्शन लिया. यह कार्रवाई उन वरिष्ठ छात्रों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जूनियर्स के साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना करने से बाज नहीं आते. 

हॉस्टल नंबर 4 का खौफनाक सच

रैगिंग का यह मामला तब उजागर हुआ जब 2024 बैच के छात्र कुनाल सूर्यवंशी ने हिम्मत दिखाते हुए सीनियर छात्रों की प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाई. जांच में सामने आया कि जब प्रथम वर्ष के छात्र अपना हॉस्टल नंबर चार छोड़कर अन्य हॉस्टलों में शिफ्ट होते हैं, तो वहां पहले से मौजूद सीनियर छात्र उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं. कुनाल के मौखिक बयानों और एंटी-रैगिंग समिति के औचक निरीक्षण ने इस कड़वे सच पर मुहर लगा दी कि हॉस्टल की दीवारों के पीछे नए छात्रों को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा था.

इन 8 छात्रों पर गिरी गाज

कॉलेज की एंटी-रैगिंग समिति ने गहन जांच और साक्ष्यों के आधार पर नवदीप चौधरी, प्रकाश बावरिया, विक्रम सिंह मीणा, धर्मेंद्र कुशवाहा, केशव गौतम, सुदीप जायसवाल, नवनीत कुशवाहा और रवि मीणा को दोषी पाया. सजा के तौर पर इन सभी को 6 माह के लिए कक्षाओं से निष्कासित कर दिया गया है और इस दौरान वे हॉस्टल में भी कदम नहीं रख पाएंगे. इसके साथ ही अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रत्येक छात्र पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इस निलंबन का सबसे बड़ा असर यह होगा कि इन छात्रों का शैक्षणिक सत्र (Academic Session) पिछड़ जाएगा, जो उनके करियर के लिए एक बड़ा धब्बा साबित हो सकता है.

कानून और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

कानूनी पहलुओं पर नजर डालें तो भारत में रैगिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी (UGC) के बेहद सख्त नियम हैं. 'राघवन समिति' की सिफारिशों के बाद से रैगिंग को एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. जबलपुर मेडिकल कॉलेज की इस त्वरित कार्रवाई ने साबित किया है कि अब कॉलेज प्रबंधन केवल कागजी नोटिस तक सीमित नहीं हैं. समिति के अध्यक्ष डॉ. नटवरलाल अग्रवाल और सचिव डॉ. रुचिर खरे सहित पूरी टीम ने औचक निरीक्षण के जरिए छात्रों का पक्ष सुना और दोषियों को सफाई का मौका देने के बाद ही यह बड़ा फैसला सुनाया.

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डीन की चेतावनी: 'बर्दाश्त नहीं होगा उत्पीड़न'

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे अन्य छात्रों के लिए एक चेतावनी बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल की पढ़ाई जैसा संवेदनशील पेशा अपनाने वाले छात्रों से उच्च स्तर के अनुशासन की उम्मीद की जाती है. डॉ. सक्सेना ने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही दोषी छात्रों के परिजनों को कॉलेज बुलाकर उनकी काउंसलिंग की जाएगी. इस सख्त कदम का उद्देश्य कॉलेज परिसर में एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण तैयार करना है, ताकि नए छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.
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