देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल इंदौर आज ट्रैफिक अव्यवस्था की समस्या से जूझ रहा है. बढ़ती वाहन संख्या, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और सड़कों पर लगातार बढ़ती अव्यवस्था को लेकर अब हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख अपना लिया है. इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन से साफ तौर पर पूछा है कि क्या व्यवस्था सुधारने के लिए सिर्फ चालान काटना ही पर्याप्त है या फिर जमीनी स्तर पर भी कोई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट की इस टिप्पणी ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ट्रैफिक को लेकर कई याचिकाएं लंबित
इंदौर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट में लंबे समय से आधा दर्जन से ज्यादा याचिकाएं विचाराधीन हैं. इन याचिकाओं में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, अपात्र लोगों द्वारा हूटर और सायरन के इस्तेमाल, बिना अनुमति विशेष सुविधाओं का उपयोग करने और सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अन्य मुद्दे उठाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है.
पिछली सुनवाई में मांगी थी विस्तृत जानकारी
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, प्रशासन और आईटी विभाग से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी तलब की थी. कोर्ट ने शहर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की संख्या, प्रमुख चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और उनकी कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी मांगी थी. साथ ही यह भी जानना चाहा था कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर केवल चालानी कार्रवाई हो रही है या व्यवस्था सुधारने के लिए कोई दीर्घकालिक योजना भी बनाई जा रही है.
स्टेटस रिपोर्ट पर उठे सवाल
बुधवार को हुई सुनवाई में सरकार की ओर से कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई. हालांकि याचिकाकर्ताओं के वकील को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई, जिस पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई. उनका कहना था कि प्रशासन की ओर से रिपोर्ट पेश किए जाने के बावजूद शहर की सड़कों पर ट्रैफिक की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है और आम लोग अब भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
हाईकोर्ट ने खुद जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय परिसर के बाहर तक ट्रैफिक नियमों का खुला उल्लंघन देखने को मिल रहा है. कोर्ट ने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों की आवाजाही, अपात्र व्यक्तियों द्वारा सायरन और हूटर के उपयोग तथा शहर में भारी वाहनों के प्रवेश जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा है.
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता मनीष यादव के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ट्रैफिक प्रबंधन का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं होना चाहिए. यदि शहर की यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है, तो प्रशासन को ऐसे ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे जिनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे. कोर्ट ने संकेत दिया है कि ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ व्यवस्था को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है.
सितंबर के तीसरे सप्ताह में फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है. इस दौरान सरकार और प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा देना पड़ सकता है. अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां हाईकोर्ट यह परखेगा कि इंदौर की सड़कों पर व्यवस्था सुधारने के लिए वास्तव में कितनी प्रगति हुई है.