Contaminated Water Death: इंदौर में दूषित पेयजल मंगलवार देर रात एक और पीड़ित की मौत हो गई. दावा किया जा रहा है कि इंदौर में दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 29 हो गई है. मृतक को उल्टी -दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उपचार के दौरान बीती रात उसकी मौत हुई.
सोमवार को हुई थी एक पूर्व वार्ड अध्यक्ष की मौत
दूषित पेयजल से इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में मौत का सिलसिल थम नहीं रहा है. सोमवार को एक कांग्रेस के एक पूर्व वार्ड अध्यक्ष की मौत हुई थी. राजाराम बौरासी नामक व्यक्ति को उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद मौत हो गई थी. हालांकि चिकित्सकों ने बौरासी की मौत को हॉर्ट अटैक से होना बताया था.
मंगलवार को खूबचंद पिता गन्नूदास की हुई मौत
रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार देर रात को भगीरथपुरा इलाके के खूबचंद पिता गन्नूदास की मौत हो गई. बताया जाता है कि भगीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार 6 मरीज़ अभी भी भर्ती हैं, जिनमें 3 आईसीयू में है और एक वेंटीलेटर पर हैं. इसके पहले कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष की मौत के बाद परिजनों ने मौत का कारण पुरानी बीमारी बताई थी.
मंगलवार को HC ने दिया न्यायिक जांच का आदेश
गौरतलब है उल्टी-दस्त के प्रकोप में कई लोगों की मौत के मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश दिया. कोर्ट ने इसके लिए उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अगुवाई में एक सदस्यीय जांच आयोग गठन किया है, जो चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी.
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चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि ‘एक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्राधिकरण' द्वारा इस मामले की 'तुरंत न्यायिक जांच' किए जाने की आवश्यकता है. कोर्ट ने न्यायिक आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया.
दूषित पानी से जुड़ी याचिकाएं सुनने के बाद आदेश
गौरतलब है मंगलवार को माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए सभी संबद्ध पक्षों को सुना और देर रात अपना आदेश दिया.
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दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ दूषित जल का प्रकोप
उल्लेखनीय है भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था और अब तक कम से कम 28 लोगों की मौत का दावा किया गया है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में कुल 23 मृतकों के 'डेथ ऑडिट' की रिपोर्ट पेश की गई है. जिसमें से सिर्फ 16 लोगों की मौत का संबंध दूषित पेयजल माना गया है.
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