इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में जलवायु परिवर्तन और जल संकट की चुनौतियों से निपटने की तैयारी शुरू हो गई. बारिश के मौसम में शहर में 21 लाख पौधे और 51,000 वर्षा जल संचयन (वाटर हार्वेस्टिंग) इकाइयां लगाने के अभियान की शुरुआत रविवार 12 जुलाई से हो गई. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक भव्य समारोह में इस अभियान का औपचारिक आगाज किया.
इस अवसर पर सीएम यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम' अभियान अब देश भर में जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है. जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और इस साल मानसून पर अल-नीनो के संभावित असर को लेकर भी चर्चा हो रही है. इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए पौधारोपण सबसे प्रभावी उपाय है, क्योंकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षों से बड़ा कोई दूसरा माध्यम नहीं है. मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत इस वर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण के करीब 2.75 लाख कार्य किए गए हैं.
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अगुवाई में बना रिकॉर्ड
इंदौर में ‘एक पेड़ मां के नाम' अभियान की अगुवाई राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि शहर में इस मानसून के दौरान अब तक 22.5 लाख पौधे लगाने के लिए स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं, जबकि हमारा लक्ष्य 21 लाख पौधे लगाने का था. इसके साथ ही शहर में 51,000 वर्षा जल संचयन इकाइयां स्थापित करने की मुहिम का भी आगाज किया गया.
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इंदौर में ‘एक पेड़ मां के नाम' अभियान की अगुवाई मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कर रहे हैं.
जल संकट का करना पड़ा सामना
विजयवर्गीय ने जल संकट का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इंदौर में इस बार गर्मियों के दौरान हमें बड़े जल संकट का सामना करना पड़ा क्योंकि 80 प्रतिशत नलकूप (बोरवेल) सूख गए थे. अगर, हमने इस बार ठीक से वर्षा जल संग्रहण कर लिया, तो हमारी अगली गर्मियां बहुत अच्छी बीतेंगी.''
नर्मदा नदी पर निर्भर 35 लाख की आबादी
बता दें कि इंदौर की 35 लाख से ज्यादा आबादी पानी की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है. नगर निगम की पाइपलाइन के जरिए पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से नर्मदा का पानी करीब 80 किलोमीटर दूर इंदौर लाया जाता है और हर दूसरे दिन जलापूर्ति की जाती है.