शुक्रवार को कांग्रेस नेता और नगर पालिका अध्यक्ष सफीक खान पर चुनावों के दौरान फर्जी दस्तावेज जमा करने के आरोप पर सुनवाई हुई. इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी और सिवनी के कलेक्टर क्षितिज सिंघल ने दोनों पक्षों की दलील सुनी. सफीक खान पर नगर पालिका चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के सामने फर्जी दस्तावेज जमा करने, आपराधिक मामलों को छुपाने और करप्शन का आरोप है. दरअसल, नगर पालिका अध्यक्ष सफीक खान के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें तीन आरोप लगाए गए थे. जिसके बाद मामले की सुनवाई के आदेश जारी हुए.
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला कलेक्टर ने अगली पेशी 8 सितंबर को निर्धारित की है. वहीं पेश किए गए सभी दस्तावेजों को जांच हेतु संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है. पेशी के दौरान सैकड़ों की संख्या में भाजपा और कांग्रेस के पार्षद नेता और कार्यकर्ता भी कोर्ट पर उपस्थित रहे.
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मामले की सुनवाई कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी न्यायालय में हुई.
दोनों पक्षों ने पेश किए सबूत
शुक्रवार को हुई सुनवाई में सफीक खान के वकील ने फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप के खिलाफ 100 साल पुराना खानदानी सिजरा पेश किया. जिसपर विपक्षी वकील का कहना था कि यह पटवारी के द्वारा हस्तलिखित सिजरा है जो कि प्रमाणिक नहीं माना जाता है. वहीं दूसरे आरोप में विपक्षी वकील ने कहा कि सफीक खान ने चुनाव के दौरान अपनी अपराधिक रिकॉर्ड छुपाए रखा. जिस पर सफीक खान के वकील ने स्पष्टीकरण दिया कि जिन मामलों में दो या दो साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान है, उन मामलों का उल्लेख किया गया है. दो साल से कम सजा वाले मामलों को उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है, इसलिए खान ने उन मामलों का उल्लेख नहीं किया. वहीं करप्शन के आरोप पर सफीक खान के वकील ने सफाई देते हुए कहा कि चुनाव के समय खान पर कोई भी करप्शन का आरोप नहीं था.