ग्वालियर में डेंगू का खतरा: 15 लाख लोगों की जिम्‍मेदारी 26 कर्मचारियों पर, जलभराव से सहमे लोग

ग्वालियर में मानसून आते ही डेंगू का खतरा मंडराने लगा है. 15 लाख की आबादी वाले शहर में स्वास्थ्य विंग के पास सिर्फ 26 कर्मचारी हैं, जिससे फॉगिंग और सर्वे ठप है.

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ग्वालियर नगर निगम के 66 वार्डों में करीब 15 लाख की आबादी निवास करती है.

ग्वालियर: मानसून की दस्तक के साथ ही ग्वालियर शहर में जानलेवा डेंगू का खतरा मंडराने लगा है. शहर में मरीज की पुष्टि होने के साथ ही जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई है. सरकारी अस्पतालों में डेंगू के संदिग्ध मरीजों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है. हालात यह हैं कि जयारोग्य चिकित्सालय (JAH) और जिला अस्पताल मुरार में बीते एक सप्ताह में करीब 125 से 140 मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए आ चुके हैं.

15 लाख की आबादी और जिम्मेदार सिर्फ 26 कर्मचारी

ग्वालियर नगर निगम के 66 वार्डों में करीब 15 लाख की आबादी निवास करती है. लोगों को डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने की जिम्मेदारी संभालने वाली मलेरिया विंग के पास निगम के 66 और कैंटोनमेंट के 7 वार्डों को मिलाकर कुल 73 वार्डों की जिम्मेदारी है. लेकिन इस विशाल क्षेत्र के लिए मलेरिया विंग के पास महज 26 कर्मचारी हैं. वहीं दूसरी ओर नगर निगम के पास फॉगिंग मशीनें चलाने के लिए केवल 10 चालक मौजूद हैं. यही कारण है कि शहर के कई हिस्सों में फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव ठप पड़ा है.

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आदित्यपुरम और पिंटो पार्क में सबसे ज्यादा दहशत

शहर के आदित्यपुरम, पुष्कर कॉलोनी और पिंटो पार्क क्षेत्रों में हर साल डेंगू का सबसे ज्यादा प्रकोप देखने को मिलता है. इन इलाकों में अभी से बारिश का पानी खाली प्लॉटों और गड्ढों में जमा हो गया है.

"पूरे क्षेत्र में बारिश का पानी भरा हुआ है, लेकिन अभी तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग करने कोई टीम नहीं आई है. यदि समय रहते छिड़काव नहीं किया गया तो डेंगू और चिकनगुनिया फिर से पैर पसार सकते हैं."

डॉ. धर्मेंद्र सक्सैना, अध्यक्ष (डीडी नगर विकास समिति)

अधिकारियों का दावा बनाम धरातल की हकीकत

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनोद दोनेरिया का दावा है कि जिन वार्डों में तीन या उससे अधिक मरीज मिल रहे हैं, वहां बार-बार कीटनाशक दवा का छिड़काव कराया जा रहा है. पुष्कर कॉलोनी के पार्क में भी दवा छिड़कवाई गई है. हालांकि हकीकत यह है कि सीमित अमले के कारण हर घर तक पहुंचना और नियमित सर्वे करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है. 

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2 साल पहले शहर में झेला का प्रकोप 

2 साल पहले ग्वालियर ने डेंगू का भयानक प्रकोप झेला था, तब भोपाल से विशेष टीम बुलानी पड़ी थी. पिछले साल मुस्तैदी के कारण डेंगू के 230 और चिकनगुनिया के 41 मामले ही आए थे, लेकिन इस बार शुरुआत में ही बरती जा रही लापरवाही स्थिति बिगाड़ सकती है.

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