MP Board Exams: तीन बार में बच्चों को दिए दो अलग-अलग पेपर, नहीं लिख सके आंसर, हंगामा हुआ तो मुंह बांधकर निकली प्रिंसिपल

कृष्णा सिंह राजावत ने बताया कि उन्हें परीक्षा शुरू होने के बाद तीन बार में दो अलग-अलग सिलेबस के पेपर दिए गए. आखिर के पांच मिनट में उनके पढ़े सिलेबस, यानी एमपी बोर्ड का सामान्य पेपर दिया गया और भरी हुई आंसर शीट में ही अपना पेपर करने को कहा गया.

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मध्य प्रदेश 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा के बीच ग्वालियर में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जहां एक परीक्षा केंद्र पर बच्चों को गलत पेपर दे दिया गया. जानकारी लगने पर बच्चों और उनके पालकों ने  हंगामा किया. उनका आरोप है कि बच्चों सिलेबस का एग्जाम दिला दिया, जिससे स्कूल के करीब 150 बच्चों की परीक्षा खराब हो गई, अब उनका साल बर्बाद होने की स्थिति बन गई है. हंगामे के बाद ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने मामले की जांच के आदेश दिए है. 

जानकारी के अनुसार, यह मामला शुक्रवार का है. ग्वालियर के वायुनगर स्थित डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़ने वाले आठवीं और पांचवीं कक्षा के बच्चों की बोर्ड परीक्षा का सेंटर सनराइज पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में था. शुक्रवार दोपहर 2 बजे छात्र अंग्रेजी की परीक्षा देने पहुंचे थे. एग्जाम  शुरू होने पर उन्हें प्रश्न पत्र बांटा गया जो एमपी बोर्ड के इंग्लिश मीडियम का सामान्य प्रश्न पत्र था. लेकिन, परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद इनविजिलेटर ने बच्चों से अंग्रेजी विषय का प्रश्न पत्र वापस ले लिया गया और एनसीईआरटी सिलेबस का अंग्रेजी विषय का प्रश्न पत्र थमा दिया. ये पूरा प्रश्न पत्र बच्चों क़ो सालभर तक पढ़ाये गए सिलेबस से एकदम अलग था. 

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स्कूल प्रिंसिपल ने ही ऐसा करने को कहा

अचानक पेपर बदलने से बच्चे परेशान हो गए. उन्होंने केंद्र अधीक्षक को बताया कि उनका पेपर गलत है. उन्हें स्कूल में एमपी बोर्ड का सामान्य सिलेबस पढ़ाया गया था, लेकिन अचानक एनसीईआरटी सिलेबस का पेपर दे दिया गया, जिसमें उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. जब इसकी शिकायत की गई तो पता चला कि स्कूल प्रिंसिपल ने ही ऐसा करने को कहा था, क्योंकि परीक्षा फॉर्म भरते समय स्कूल प्रबंधन ने बोर्ड में इंग्लिश मीडियम के साथ एनसीईआरटी सिलेबस का फॉर्म भर दिया था, वह भी बच्चों को बिना बताए. जबकि उन्हें पढ़ाई एमपी बोर्ड के सामान्य सिलेबस के हिसाब से ही कराई गई थी.

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बच्चे और पेरेंट्स ने हंगामा शुरू किया

हंगामे के कुछ देर बाद, जब परीक्षा में महज़ 15 मिनट बचे थे, तभी एक बार फिर उन्हें एमपी बोर्ड का सामान्य पेपर थमा दिया गया. ऐसे में बच्चे अपनी परीक्षा दे ही नहीं पाए और कॉपी में कुछ भी नहीं लिख पाए.यह बात बच्चों ने उन्हें लेने आए अपने परिजनों को बताई तो वे आक्रोशित हो गए और स्कूल प्रबंधन व प्रिंसिपल से बात करने का प्रयास किया. लेकिन उनकी बात समझने के बजाय प्राचार्य ने उनसे बहस करते हुए कहा कि आप परेशान न हों, सभी बच्चे पास हो जाएंगे. इस रवैये के बाद बच्चे और पेरेंट्स सकते में आ गए और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया.

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तीन बार में दो अलग-अलग पेपर दिए गए

कृष्णा सिंह राजावत ने बताया कि उन्हें परीक्षा शुरू होने के बाद तीन बार में दो अलग-अलग सिलेबस के पेपर दिए गए. आखिर के पांच मिनट में उनके पढ़े सिलेबस, यानी एमपी बोर्ड का सामान्य पेपर दिया गया और भरी हुई आंसर शीट में ही अपना पेपर करने को कहा गया. दूसरी शीट भी नहीं दी गई और उन्हें दो घंटे बैठाकर रखा गया.

पेपर खराब हो गया 

कक्षा पांच में पढ़ने वाली छात्रा कशिश भदौरिया ने भी बताया कि पूरे साल कक्षा में उन्हें एमपी बोर्ड का सामान्य सिलेबस पढ़ाया गया था, लेकिन बोर्ड परीक्षा में उन्हें एनसीईआरटी सिलेबस का पेपर दे दिया गया, जिसकी वजह से वह पेपर नहीं दे पाई.

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रोते हुए घर आई बेटी 

स्कूल आए एक बच्चे की गार्जियन कीर्ति पाठक ने बताया कि उनकी बेटी डॉन बॉस्को स्कूल में पांचवीं की छात्रा है. शुक्रवार 20 फरवरी 2026 को वह रोते हुए घर आईं और बताया कि उनके अंग्रेजी का पेपर स्कूल की गलती से खराब हो गया. कई पेरेंट्स को तो अभी तक यह जानकारी ही नहीं है कि उनके बच्चों का पेपर बिगड़ गया है. लोगों का कहना है कि हंगामा बढ़ता देख प्रिंसिपल मुंह बांधकर स्कूल से निकल गईं.

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