Stamp Scam: मध्य प्रदेश में सामने आया करोड़ों का स्टाम्प घोटाला, ऑडिट में खुली पोल

Stamp Scam in Madhya Pradesh: दिसंबर 2025 में ग्वालियर से आई संयुक्त संचालक कोष और लेखा की टीम ने निरीक्षण के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड (IFMIS) और भौतिक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया . शुरुआती गणना में यह अंतर 3 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक का था. बाद में कुछ चालानों की प्रविष्टियां मिलने पर यह राशि 2 करोड़ 70 लाख 25 हजार 310 रुपये निर्धारित की गई.

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Stamp Ghotala: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना (Guna) जिला कोषालय में शासकीय स्टाम्पों की हेराफेरी का एक गंभीर मामला उजागर हुआ है. प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के स्टाम्प स्टॉक में गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं. इस मामले में कैंट थाना पुलिस ने सहायक ग्रेड-3 (खंजाची) केशव वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

दिसंबर 2025 में ग्वालियर से आई संयुक्त संचालक कोष और लेखा की टीम ने निरीक्षण के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड (IFMIS) और भौतिक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया . शुरुआती गणना में यह अंतर 3 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक का था. बाद में कुछ चालानों की प्रविष्टियां मिलने पर यह राशि 2 करोड़ 70 लाख 25 हजार 310 रुपये निर्धारित की गई. जांच में सामने आया कि संबंधित कर्मचारी इस अंतर का संतोषजनक हिसाब देने में असफल रहा.

डबल लॉक सिस्टम की अनदेखी

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने बिना सक्षम अनुमति, बिना कंप्यूटर प्रविष्टि और बिना पावती के स्टाम्प वेंडरों को स्टाम्प जारी किए. सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि कोषालय में लागू ‘डबल लॉक सिस्टम' के सुरक्षा प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया. इससे शासकीय स्टाम्पों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

लिखित स्वीकारोक्ति, लेकिन जांच जारी

सूत्रों के अनुसार, केशव वर्मा ने लिखित रूप से यह स्वीकार किया है कि स्टाम्प वितरण में उनसे त्रुटि हुई. हालांकि, पुलिस और प्रशासन इसे साधारण भूल नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता मान रहे हैं. वरिष्ठ कोषालय अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि ऑडिट के दौरान रिकॉर्ड उपलब्ध न कराए जाने से मामला सामने आया. फिलहाल, संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है.

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कैंट थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(क) के तहत मामला दर्ज किया है. सीएसपी प्रियंका मिश्रा के अनुसार, पुलिस 72 पन्नों की ऑडिट रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचकर यह भी जांचा जाएगा कि क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल हैं.

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