मोहब्बत के महीने में गुलाब ने बदली किसान रूपनारायण की किस्मत, वैलेंटाइन वीक में हुई लाखों की कमाई

Gulab ki Kheti : वैलेंटाइन वीक में गुलाब की बढ़ती मांग किसानों के लिए वरदान बन रही है. आगर मालवा के किसान रूपनारायण माली ने पारंपरिक खेती छोड़कर गुलाब की खेती अपनाई और आज लाखों रुपये सालाना कमा रहे हैं.

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मोहब्बत के महीने में जब हर हाथ में गुलाब दिखता है, तब यही फूल किसी के लिए सिर्फ इजहार-ए-प्यार नहीं, बल्कि खुशहाली की खुशबू भी बन जाता है. वैलेंटाइन वीक 2026 के रोज डे पर बाजार गुलाब से सजा है, दाम आसमान छू रहे हैं और इसी भीड़ में एक कहानी खेतों से निकलकर सुर्खियों तक पहुंच रही है. मध्‍य प्रदेश के आगर मालवा की मिट्टी में उगा गुलाब अब सिर्फ प्रेम का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि मेहनत, समझदारी और नवाचार से बदली गई किस्मत की पहचान बन चुका है. 
 

आगर मालवा जिले में गुलाब की खेती से किसान रूपनारायण माली ने अपनी किस्मत बदल ली है. पुश्तैनी जमीन पर वर्षों तक गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी परंपरागत फसलें उगाने वाले रूपनारायण को कम मुनाफे और अधिक जोखिम ने नई राह सोचने पर मजबूर किया. करीब 10 साल पहले उन्होंने खेती के पुराने ढर्रे को तोड़ते हुए गुलाब की खेती करने का फैसला लिया. यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ.

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डिवाइन प्रजाति से रोजाना कमाई

रूपनारायण माली बताते हैं कि उन्होंने अपनी जमीन के करीब पांच बीघा हिस्से में डिवाइन प्रजाति के उच्च गुणवत्ता वाले गुलाब के पौधे लगाए. आज उनके खेत में 10 हजार से अधिक डिवाइन किस्म के गुलाब के पौधे फूलों से लदे हुए हैं.

इन पौधों से प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ क्विंटल गुलाब के फूल निकलते हैं, जिन्हें वे मंडी में बेचते हैं. गुलाब की खेती की खास बात यह है कि इससे दो तरह से फायदा होता है. एक ओर बड़े शहरों में मांग निकलने पर अच्छे दाम मिलते हैं, वहीं स्थानीय बाजार में रोजाना बिक्री से नगद आमदनी होती है. 

वैलेंटाइन वीक में बढ़ता मुनाफा

रूपनारायण बताते हैं कि वैलेंटाइन डे से करीब एक सप्ताह पहले ही बड़े शहरों में डिवाइन प्रजाति के गुलाब की मांग बढ़ जाती है. प्रेम के इजहार के लिए इसी किस्म के गुलाब का सबसे ज्यादा उपयोग होता है. इस दौरान गुलाब के दाम अच्छे मिलते हैं और यह समय किसानों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफे वाला होता है. हालांकि कभी-कभी उत्पादन अधिक होने पर भाव गिर भी जाते हैं, लेकिन नुकसान की संभावना दूसरी फसलों की तुलना में कम रहती है. 

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इत्र से गुलकंद तक, कई रूपों में गुलाब

डिवाइन प्रजाति के साथ-साथ रूपनारायण अपने खेत में देशी गुलाब का भी उत्पादन करते हैं. गुलाब का इस्तेमाल सिर्फ खुशबू या सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे इत्र, तेल, अगरबत्ती, गुलाबजल, गुलकंद और कई औषधियां तैयार की जाती हैं.  उनका कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर इन उत्पादों को तैयार करने की इकाइयां स्थापित हों, तो गुलाब की खेती करने वाले छोटे और मझोले किसानों को और बेहतर अवसर मिल सकते हैं. 

प्रशासन भी फूलों की खेती को दे रहा बढ़ावा

कलेक्टर प्रीति यादव ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि आगामी सिंहस्थ उज्जैन को ध्यान में रखते हुए जिले के फूल उत्पादक किसानों को अभी से तैयार किया जा रहा है. किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है और शासन की योजनाएं उन तक पहुंचाई जा रही हैं. उद्देश्य यह है कि जिले में फूलों की खेती का रकबा बढ़े और आगर मालवा को एक नए फ्लावर हब के रूप में पहचान मिले. 

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मुख्यमंत्री की पहल, किसानों को नई उम्मीद

हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फूलों की खेती को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसानों के लिए अवसर उपलब्ध कराने की बात कही है. इसके तहत जिले में दो दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में फूल उत्पादक किसानों ने हिस्सा लिया. कई वैरायटी के गुलाब प्रदर्शनी में देखने को मिले और बड़ी संख्या में किसान अब गुलाब की खेती को अपनाने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं.

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