GBS Infection: मंदसौर के 50 वर्षीय व्यक्ति में दिखे GBS के लक्षण; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जानिए क्या है खतरा?

Guillain Barre Syndrome: GBS के लक्षण दिखने के बाद ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा गया है कि खाना अच्छी तरह पकाकर ही खाएं, उबला हुआ पानी पिएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में मौजूद रहकर लोगों को जागरूक कर रही है.

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GBS Infection: मंदसौर के 50 वर्षीय व्यक्ति में दिखें GBS के लक्षण; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जानिए क्या है खतरा?

GBS Infection: मध्यप्रदेश के मंदसौर (Mandsaur) जिले के गरोठ क्षेत्र स्थित गांव कोटड़ा बुजुर्ग में 50 वर्षीय व्यक्ति में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग (MP Health Department) में हड़कंप मच गया है. जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने व्यापक सर्वे और जांच अभियान शुरू कर दिया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोटड़ा बुजुर्ग निवासी गोपाल पाटीदार (50 वर्ष) को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते इंदौर ले जाया गया था, जहां निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनमें GBS के लक्षण पाए गए. मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई.

GBS Outbreak: सर्वे करती हुई स्वास्थ्य विभाग की टीम

सर्वे में ये मिला

स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में घर-घर सर्वे कर कुल 3,801 लोगों की स्कैनिंग की गई. इस दौरान पांच लोगों में बुखार के लक्षण पाए गए, जिनके रक्त नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे गए हैं. फिलहाल किसी अन्य व्यक्ति में GBS की पुष्टि नहीं हुई है.

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गांव में संक्रमण की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त मेडिकल टीमें भी पहुंच रही हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

हाल ही में नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में GBS से ग्रसित कुछ बच्चों की मृत्यु के बाद यह मामला सामने आने से प्रशासन और स्वास्थ्य अमले की चिंता और बढ़ गई है.

अधिकारियों ने क्या कहा?

गरोठ के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. दरबार सिंह ने बताया कि एहतियातन पूरे गांव में स्क्रीनिंग की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक गोपाल पाटीदार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति में GBS की पुष्टि नहीं हुई है. बुखार से पीड़ित लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.

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ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा गया है कि खाना अच्छी तरह पकाकर ही खाएं, उबला हुआ पानी पिएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में मौजूद रहकर लोगों को जागरूक कर रही है.

फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और जांच रिपोर्ट्स का इंतजार किया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

क्या है गिलियन बैरे सिंड्रोम(GBS)?

गिलियन बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. इस बीमारी में शरीर की इम्यूनिटी गलती से खुद की नसों पर हमला करने लगती है.
इस प्रक्रिया में बनने वाली एंटीबॉडी नसों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे नर्व सिग्नल ठीक से काम नहीं कर पाता. नतीजतन, मांसपेशियों में तेजी से कमजोरी आने लगती है और मरीज को चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है.

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किन कारणों से हो सकता है GBS?

विशेषज्ञों के अनुसार, GBS अक्सर किसी संक्रमण के बाद ट्रिगर होता है. इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

  • फ्लू या वायरल संक्रमण
  • डेंगू
  • कोविड-19
  • डायरिया
  • फूड प्वाइजनिंग

संक्रमण के बाद शरीर की इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाती है और नसों को नुकसान पहुंचाने लगती है.

गिलियन बैरे सिंड्रोम के शुरुआती और गंभीर लक्षण | Early and Severe Symptoms of Guillain-Barre Syndrome

GBS के लक्षण तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

शुरुआती लक्षण:

  • पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
  • चलने में कमजोरी
  • हाथों की ताकत कम होना

गंभीर लक्षण:

  • बोलने और निगलने में परेशानी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • दिल की धड़कन का अनियमित होना
  • ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव

यह बीमारी तब बेहद गंभीर हो जाती है, जब यह गले और सांस से जुड़ी मांसपेशियों को प्रभावित करती है. ऐसी स्थिति में मरीज कुछ भी निगल नहीं पाता और उसे आईसीयू में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है.

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क्या GBS ठीक हो सकता है?

राहत की बात यह है कि सही समय पर इलाज मिलने पर 80 से 90 प्रतिशत मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. हालांकि, इसमें समय लग सकता है और कुछ मरीजों को लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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