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This Article is From Mar 16, 2026

पूर्व नक्सलियों ने बंदूक छोड़ थामी सिलाई मशीन, आत्मसमर्पण के बाद अपनाए रोजगार के नए साधन

पूर्व नक्सलियों ने बंदूक छोड़ सिलाई मशीन थामकर नई जिंदगी की शुरुआत की है. आत्मसमर्पण के बाद उन्हें शासन और पुलिस प्रशासन की पुनर्वास योजनाओं के तहत सिलाई, कौशल विकास और रोजगार प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

पूर्व नक्सलियों ने बंदूक छोड़ थामी सिलाई मशीन, आत्मसमर्पण के बाद अपनाए रोजगार के नए साधन

Naxalite Surrender News 2026: कभी जंगलों में बंदूक के सहारे हिंसा का रास्ता अपनाने वाले नक्सली आज उसी दृढ़ता के साथ सिलाई मशीन थामकर अपनी नई जिंदगी बुन रहे हैं. आत्मसमर्पण के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने की कोशिश में लगे ये पूर्व नक्सली अब मेहनत और हुनर को अपनी पहचान बना रहे हैं. शासन की नक्सल पुनर्वास नीति और पुलिस प्रशासन के सहयोग से उनके जीवन में यह बड़ा बदलाव आया है, जिससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की नई उम्मीद जगी है.

बंदूक छोड़, नई राह पर कदम

जिले में करीब एक दर्जन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है. इनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं, जो पहले बंदूक उठाने के लिए मजबूर थे, लेकिन अब शांति और सम्मान की जिंदगी चाहते हैं. आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने उन्हें कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा है, ताकि वे अपनी रोज़मर्रा की जरूरतें खुद पूरी कर सकें और समाज में नए सिरे से शुरुआत कर सकें.

कौशल प्रशिक्षण से मिली नई पहचान

पुलिस प्रशासन की पहल पर इन पूर्व नक्सलियों को सिलाई मशीन चलाने और कपड़े सिलने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षित प्रशिक्षक उन्हें सिलाई के बुनियादी से लेकर उन्नत कौशल तक सिखा रहे हैं. खास बात यह है कि प्रशिक्षण के दौरान वे पुलिस की वर्दी सिलने का काम भी सीख रहे हैं, जिससे उनमें एक नई जिम्मेदारी और आत्मविश्वास का भाव पैदा हुआ है.

सरकार की योजना से बढ़ा आत्मविश्वास

शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को उनकी रुचि के अनुसार अलग‑अलग स्किल डेवलपमेंट कोर्स करवाए जा रहे हैं. उद्देश्य यह है कि वे सिर्फ आज भर का नहीं, बल्कि भविष्य का स्थायी रोजगार बना सकें. पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 10 पूर्व नक्सली शामिल हैं. कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, ताकि वे अपना काम आगे बढ़ा सकें.

डर से निकलकर आत्मनिर्भरता की ओर

नौकरी पाने वाले हितग्राहियों ने बताया कि पहले पुलिस विभाग से जुड़ने को लेकर उनके मन में डर रहता था. उन्हें यह आशंका रहती थी कि कहीं उनके साथ भी वैसा ही सलूक न हो जैसा कभी उनके परिजनों के साथ हुआ था. लेकिन अब, बालाघाट जिले में नक्सली गतिविधियों में भारी कमी आने के बाद उनका विश्वास लौट आया है. क्षेत्र लगभग नक्सल‑मुक्त होने के कारण उनका भय भी खत्म हो गया है, और अब वे पूरी खुशी और आत्मविश्वास के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं.

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