चमचमाती सफेद कार से फिल्मी स्टाइल में चल रहा जेब काटने का खेल, पुलिस ने ऐसे किया पर्दाफाश

मऊगंज की सड़कों पर कुछ ऐसा हो रहा था, जिसे सुनकर कोई भी हैरान हो जाए. जी हां, सफेद रंग की चमचमाती लग्जरी कार और उसमें बैठा शातिर ठग का खेल पूरी तरह फिल्मी और रहस्यमय था. वो सिर्फ सड़क पर नहीं घूमता नहीं था, वो भरोसे, रिश्तों और विश्वास की मासूमियत पर हमला करता था.

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चमचमाती सफेद कार का फिल्मी खेल, पहले बैंक की रेकी, फिर बुजुर्ग और महिलाओं को निशाना बनाना, परिचित बताकर गाड़ी में बैठाना, बातों में उलझाकर जेब काटना और फरार हो जाना, पुलिस ने किया पर्दाफाश.

मऊगंज की सड़कों पर कुछ ऐसा हो रहा था, जिसे सुनकर कोई भी हैरान हो जाए. जी हां, सफेद रंग की चमचमाती लग्जरी कार और उसमें बैठा शातिर ठग का खेल पूरी तरह फिल्मी और रहस्यमय था. वो सिर्फ सड़क पर नहीं घूमता नहीं था, वो भरोसे, रिश्तों और विश्वास की मासूमियत पर हमला करता था.

पहले बैंक की बारीकी से रेकी

आरोपी इतना चालाक था कि वह पहले बैंकों की रेकी करता, ताकि आसानी से लूट की वारदात को अंजाम दिया जा सके. फिर यही से जेब काटने का खेल शुरू कर देता था.

रिश्तेदार बनकर ठगी

ये शातिर पहले लोगों का विश्वास जीतने के लिए बैंकों के बाहर रेकी कर बुजुर्गों को 'फूफा, मामा या ताऊ' बता कर विश्वास जीतता था.

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​लिफ्ट देने का झांसा

फिर पैदल जा रहे बुजुर्गों को यह कहकर गाड़ी में बैठा लेता था कि मैं भी आपके गांव की तरफ जा रहा हूं. फिर धोखा देकर बैठा लेता था और रास्ते में जेब काटकर उतार देता था.

​चाय का बहाना

जब मौका मिलता, वह सीधे बुज़ुर्गों के पास जाकर खुद को परिचित बताता. हंसी, मुस्कान, और ढेर सारा भरोसा, बस, बुज़ुर्ग उसकी चाल में फंस जाते. "चलिए चाय पीते हैं" कहकर वाहन में बैठाना और मौका पाकर पैसे चोरी कर लेना ये इस गिरोह का शगल था.

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वारदात को अंजाम दे कर हो जाता था रफूचक्कर

फिर आता था उसका असली खेल पलक झपकते ही जेबें खाली, नोट गायब. कुछ बुज़ुर्गों की जीवन भर की कमाई, चंद मिनटों में उड़ा दी जाती. उसकी चालाकी इतनी थी कि कोई देख भी नहीं पाता. रास्ते चलती महिलाओं से लूट की वारदात को अंजाम दे कर रफूचक्कर हो जाता था.

आरोपी की रहस्यमय फरारी

काम खत्म होते ही वह फरार हो जाता, जैसे हवा में घुम गया हो. सफेद कार और उसका रहस्य दोनों ही लोगों के दिमाग में डर और सवाल छोड़ जाते.

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पुलिस ने रणनीति बनाकर आरोपी पर कसा शिकंजा

कानून हमेशा पीछे नहीं रहता. मऊगंज पुलिस ने खुफिया जानकारी और सतत निगरानी के दम पर आरोपी पर शिकंजा कसा. तेज़ रणनीति, चौकस निगरानी, खुफिया सूचना और फिर एक ही झटके में आरोपी सद्दाम को सलाखों के पीछे भेज दिया गया. जो कल तक चमचमाती सफेद कार में बुज़ुर्गों की कमाई उड़ा रहा था. आज वही पुलिस के सामने सिर झुकाए खड़ा है. मऊगंज के लोग अब सुरक्षित हैं, लेकिन यह कहानी याद दिलाती है, सतर्क रहना और भरोसे के नाम पर आंखें बंद न करना ही सबसे बड़ा बचाव है,कोई भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दे.

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वहीं, इस पूरे मामले में मऊगंज थाना प्रभारी संदीप भारतीय ने बताया कि एक बड़ा गिरोह इस तरह की पूरी वारदात को अंजाम दे रहा था. पूछताछ में दर्जनों वारदात अलग-अलग जिलों जैसे रीवा, कटनी, मैहर,अमरपाटन, नागौद, आदि जगहों में आरोपियों ने जो स्वीकार किया है जिसकी जानकारी ICJS (Interoperable criminal justice system) से जुटाई जा रही है. कुछ और आरोपियों की तलाश भी जारी है.

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