Fake Doctor: फर्जी डॉक्टर बनकर बुजुर्ग व बीमारों से ठगी; अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने किया खुलासा

Fake Doctor: आरोपियों ने बताया कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के बीमार लोगों को निशाना बनाते थे. पहले खुद को परिचित बताते, फिर मोबाइल पर कथित डॉक्टर से बात कराकर भरोसा दिलाते. महंगी दवा और खास फार्मूले का झांसा देकर क्यूआर कोड से पैसे ट्रांसफर करवाते और फरार हो जाते.

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Fake Doctor: फर्जी डॉक्टर बनकर बुजुर्ग व बीमारों से ठगी; अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने किया खुलासा

Fake Doctor Arrested: नर्मदापुरम की थाना देहात पुलिस (Narmadapuram Police) ने एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो बीमारी ठीक करने का झांसा देकर बुजुर्ग और बीमार लोगों से ठगी करता था. पुलिस ने इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, 13 और 14 दिसंबर 2025 को आरोपियों ने नर्मदापुरम निवासी एक फरियादी से संपर्क किया. उन्होंने खुद को परिचित बताते हुए बीमारी ठीक करने की गारंटी दी और एक कथित डॉक्टर का मोबाइल नंबर दिया. फोन पर बातचीत के बाद आरोपियों ने घर आकर जांच और इलाज करने का आश्वासन दिया. अगले दिन दोनों आरोपी फरियादी के घर पहुंचे और खुद को डॉक्टर बताते हुए बीमारी की जांच की. उन्होंने “पेटेंट फार्मूला” वाली महंगी दवा से पूर्ण आराम होने का दावा किया और मोबाइल पर क्यूआर कोड दिखाकर 1 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए. इसके बाद “दवा गाड़ी में रखी है” कहकर दोनों मौके से फरार हो गए.

पुलिस ने तुरंत लिया एक्शन

फरियादी की शिकायत पर थाना देहात पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस थोटा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन और एसडीओपी जितेंद्र कुमार पाठक के मार्गदर्शन में टीम गठित की गई. जांच में आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज और वाहन के आधार पर तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए. पता चला कि ठगी की राशि राजस्थान में एटीएम से निकाली गई थी. इसके बाद पुलिस ने भोपाल और राजस्थान के घुमक्कड़ डेरों में तलाश कर घटना में प्रयुक्त वाहन के साथ दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के बीमार लोगों को निशाना बनाते थे. पहले खुद को परिचित बताते, फिर मोबाइल पर कथित डॉक्टर से बात कराकर भरोसा दिलाते. महंगी दवा और खास फार्मूले का झांसा देकर क्यूआर कोड से पैसे ट्रांसफर करवाते और फरार हो जाते. वारदात के बाद मोबाइल बंद कर सिम और फोन फेंक देते थे तथा हर बार नए सिम और मोबाइल का इस्तेमाल करते थे.

पुलिस की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बीमारी ठीक करने के नाम पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति के झांसे में न आएं. बिना सत्यापन किसी को भी ऑनलाइन या नगद राशि न दें. संदिग्ध व्यक्ति दिखने पर तुरंत नजदीकी थाना या कंट्रोल रूम को सूचना दें.

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