कभी पटवारी बनने का था सपना, आज कंधों पर DSP के सितारे: कई बार मिलीं असफलताएं, डीएसपी रोशनी पटेल ने बताई सफलता की कहानी

DSP Roshni Patel: सागर की रहने वाली रोशनी पटेल का बचपन एक साधारण परिवार में बीता. उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी अधिकारी बने. हालांकि बेटी के अफसर बनने से पहले ही उनका निधन हो गया. वो बेटी के कंधों पर DSP के सितारे नहीं देख पाए.

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Singrauli  DSP Roshni Patel Success Story: कहते हैं कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, बस उन्हें पूरा करने का हौसला होना चाहिए. मध्य प्रदेश के सागर की रहने वाली एक बेटी ने इसी हौसले के दम पर अपने जीवन की कठिन राहों को पार करते हुए वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना कभी उसने भी नहीं देखा था. यह कहानी है डीएसपी रोशनी पटेल की, जिनकी मेहनत, संघर्ष और जिद ने उन्हें आज एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी बना दिया है. आज वह रोशनी पटेल सिंगरौली में अपनी सेवाएं दें रही है.

साधारण परिवार में बीता बचपन

NDTV से खास बातचीत में रोशनी पटेल ने बताया कि उनका बचपन एक साधारण परिवार में बीता. घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन परिवार में शिक्षा को हमेशा महत्व दिया जाता था. रोशनी बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती थीं. हालांकि उस समय उनका सपना बहुत बड़ा नहीं था. वह बस इतना चाहती थीं कि पढ़-लिखकर एक सरकारी नौकरी हासिल कर लें. उनका पहला सपना पटवारी बनने का था.

पिता का था सपना

रोशनी बताती हैं कि उनके जीवन में सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता थे. उनके पिता हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करते थे और कहते थे कि बेटी अगर मेहनत करे तो वह किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती है. पिता की यही बातें रोशनी के दिल में घर कर गईं और उन्होंने पढ़ाई को ही अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया.

पिता की मौत से टूट गई थी DSP रोशनी पटेल

लेकिन जिंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया. रोशनी के पिता का निधन हो गया. पिता के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. उस समय रोशनी के सामने दो रास्ते थे- या तो परिस्थितियों के आगे हार मान लें, या फिर अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करें.

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कई बार असफलताएं मिलीं

रोशनी ने दूसरा रास्ता चुना.उन्होंने ठान लिया कि वह अपने पिता के सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगी. यही जिद और यही संकल्प उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया. उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. शुरुआत में उनका लक्ष्य सिर्फ पटवारी बनने का था, लेकिन धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया. उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की. यह रास्ता आसान नहीं था. कई बार असफलताएं मिलीं, कई बार निराशा भी हुई, लेकिन रोशनी ने कभी हार नहीं मानी.

MPPSC परीक्षा में चयन होने नम हो गईं आंखें

दिन-रात की कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के बाद आखिरकार वह दिन भी आया जब उनकी मेहनत रंग लाई. रोशनी पटेल का चयन डीएसपी पद के लिए हो गया. यह खबर सुनते ही उनके घर में खुशी का माहौल बन गया, लेकिन उस खुशी के बीच एक कमी हमेशा महसूस हुई, उनके पिता की.

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रोशनी कहती हैं कि जब उन्हें अपने चयन की खबर मिली तो उनकी आंखें नम हो गईं. उस समय उन्हें सबसे ज्यादा अपने पिता की याद आई. भावुक होकर उन्होंने कहा, 'अगर आज पापा होते तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी होती. उन्होंने हमेशा कहा था कि मुझे पढ़-लिखकर बड़ा अधिकारी बनना है.'

आज रोशनी पटेल एमपी के सिंगरौली जिले में एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं. उनकी यह सफलता सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन हजारों लड़कियों के लिए भी प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं.

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रोशनी का मानना है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान के अंदर मेहनत करने की लगन और अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता. सागर की इस बेटी की कहानी आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखता है.

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