Savita Pradhan Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सविता प्रधान (Savita Pradhan) की, जिन्होंने गरीबी, अत्याचार, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा और कड़ी मेहनत के दम पर आज एक अफसर बनकर समाज के लिए मिसाल बन गई हैं.
सविता की कम उम्र में हो गई शादी
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम के मड़ई के रहने वाली सविता की जिंदगी में संघर्ष बहुत जल्दी शुरू हो गया था. कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई. बचपन के सपने अभी पूरे भी नहीं हुए थे कि जिम्मेदारियों का बोझ उनके कंधों पर आ गया. उन्होंने सोचा था कि शादी के बाद जिंदगी में खुशियां आएंगी, लेकिन ससुराल में उनका स्वागत प्यार से नहीं बल्कि तानों और अत्याचार से हुआ.
ससुराल में पिटाई
शादी के कुछ समय बाद ही सविता को पति की मारपीट और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. छोटी-छोटी बातों पर उन्हें अपमानित किया जाता था. कई बार उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी अब अंधेरे में डूब चुकी है. हालात इतने बदतर हो गए कि एक दिन सविता ने जिंदगी से हार मानने तक का सोच लिया था, लेकिन तभी उनकी नजर अपने दो मासूम बच्चों पर पड़ी. बच्चों का चेहरा देखते ही उनका मन बदल गया. उन्होंने तय किया कि अब वह टूटेंगी नहीं, बल्कि अपने बच्चों के लिए लड़ेंगी.

ससुराल छोड़ घर ने निकल गई सविता
एक दिन सविता ने हिम्मत जुटाई और अपने दोनों बच्चों को साथ लेकर ससुराल का घर छोड़ दिया. उस वक्त उनके पास न पैसे थे, न कोई बड़ा सहारा. लेकिन उनके अंदर अपने बच्चों का भविष्य संवारने की जिद जरूर थी. घर छोड़ने के बाद जिंदगी और भी कठिन हो गई. पेट पालने के लिए उन्होंने छोटे-छोटे काम शुरू किए. कभी जंगलों में जाकर महुआ बीनतीं, तो कभी बीड़ी के पत्ते तोड़तीं. कई बार दिनभर मेहनत करने के बाद भी मुश्किल से दो वक्त की रोटी नसीब होती थी.
दिन में काम... रात में की पढ़ाई
लेकिन सविता ने हार नहीं मानी. बच्चों का पेट भरने और उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने एक ब्यूटी पार्लर में भी काम करना शुरू किया. इस दौरान उनका किताबों की ओर प्रेम फिर से बढ़ा और अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू कर दी. दिनभर काम करने के बाद वो रात में पढ़ाई करती थीं. कई रातें ऐसी भी होती थीं जब थकान से आंखें बंद हो जाती थीं, लेकिन सपने उन्हें सोने नहीं देते थे. उन्हें पता था कि अगर जिंदगी बदलनी है तो मेहनत करनी ही होगी.
MPPSC परीक्षा में हासिल की सफलता
सालों की मेहनत, संघर्ष और आंसुओं के बाद आखिरकार वह दिन भी आया जब सविता प्रधान ने अपनी मेहनत के दम पर अफसर बनी. साल 2006 में पहले ही प्रयास में MPPSC में सफलता हासिल की. प्री, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू पास करने पर कुल 75000 रुपये स्काॉलरशिप मिली. सविता की पहली पोस्टिंग एपमी के नीमच जिले में सीएमओ के पद पर हुई. आज सविता प्रधान सिंगरौली नगर निगम में आयुक्त (Singrauli Municipal Corporation Commissioner) के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है.

Savita Pradhan: सविता प्रधान सिंगरौली नगर निगम में आयुक्त के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है.
जिस महिला को कभी कमजोर समझा गया, जिस पर ताने कसे गए... आज वही सविता समाज के सामने एक मिसाल बन चुकी हैं. आज उनकी सफलता सिर्फ उनकी जीत नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो किसी न किसी दर्द से गुजर रही हैं.
सविता प्रधान ने NDTV से क्या कहा?
NDTV से खास बातचीत में सविता प्रधान बताती हैं कि जिंदगी में मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन अगर इंसान हार न माने तो एक दिन वही मुश्किलें उसकी ताकत बन जाती हैं. आज सविता अपने बच्चों के साथ सम्मान और आत्मसम्मान की जिंदगी जी रही हैं. उनकी कहानी हर उस महिला को यह संदेश देती है कि अगर हिम्मत हो तो सबसे अंधेरा वक्त भी एक दिन उजाले में बदल सकता है.
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