Dewas Liquor Policy Controversy: देवास जिले में लागू नई शराब नीति 2026 की जमीनी हकीकत सामने आते ही कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. नीति के तहत जिन शराब दुकानों की नीलामी होनी थी, वे अब तक नीलाम नहीं हो पाई हैं. ऐसी स्थिति में इन दुकानों का संचालन खुद आबकारी विभाग कर रहा है. हालांकि मौके पर जो हालात दिख रहे हैं, वे न सिर्फ व्यवस्था की कमजोरी उजागर करते हैं, बल्कि नियमों की खुलेआम अनदेखी की तस्वीर भी पेश करते हैं.
21 दुकानें नीलामी से बाहर
आबकारी विभाग के अनुसार देवास शहर की 6 और ग्रामीण क्षेत्रों की कुल मिलाकर लगभग 21 शराब दुकानें अब तक नीलाम नहीं हो सकी हैं. इन दुकानों को अस्थायी रूप से आबकारी विभाग अपने कर्मचारियों की मदद से संचालित कर रहा है. कुछ दुकानों पर तो बाकायदा विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आ रही है.
कर्मचारियों को नहीं मालूम शराब के दाम
चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिन कर्मचारियों को दुकानों पर बैठाया गया है, उन्हें शराब के रेट तक की सही जानकारी नहीं है. नियम के अनुसार हर शराब दुकान पर दो शासकीय कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन कई दुकानों पर सिर्फ एक ही कर्मचारी नजर आ रहा है. कहीं-कहीं तो शासकीय कर्मचारी की जगह कोई और ही व्यक्ति दुकान संभालता दिख रहा है.
रेट लिस्ट नदारद, नियमों की खुली अनदेखी
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि किसी भी शराब दुकान पर रेट लिस्ट साफ तौर पर नहीं लगी हुई है. इससे मदिरा प्रेमियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. लोग दाम पूछते हैं, लेकिन दुकानों पर बैठे लोगों के पास संतोषजनक जवाब तक नहीं होता.
डिजिटल पेमेंट को लेकर विरोधाभासी बयान
देवास आबकारी विभाग के अधिकारी महेश पटेल का कहना है कि विभाग फोनपे, गूगल पे जैसे माध्यमों से भुगतान नहीं ले सकता, क्योंकि आबकारी विभाग का कोई अलग बैंक खाता नहीं है. लेकिन हकीकत यह है कि दुकानों पर खुलेआम मोबाइल फोन के जरिए डिजिटल पेमेंट लिया जा रहा है और शराब बेची जा रही है. यह स्थिति विभागीय दावों और जमीनी सच्चाई के बीच बड़ा फर्क दिखाती है.
मदिरा प्रेमी खाली हाथ लौटने को मजबूर
शराब दुकानों पर पहुंचने वाले ग्राहकों को कई बार निराश होकर लौटना पड़ रहा है. कारण यह है कि दुकानों पर कई ब्रांड और किस्म की शराब उपलब्ध ही नहीं है. गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा मांग वाली बीयर भी कई दुकानों पर नहीं मिल रही है, जिससे लोगों में नाराजगी साफ देखी जा सकती है.
ड्यूटी पर अधिकारी नहीं, प्राइवेट लोग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन आबकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी दुकानों पर लगाई गई है, वे मौके पर नजर नहीं आ रहे. उनकी जगह प्राइवेट लोग दुकान संभालते दिख रहे हैं, जो अपने निजी मोबाइल फोन से भुगतान भी ले रहे हैं. यह हाल सिर्फ शहरी दुकानों का नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी यही तस्वीर सामने आई है.
ग्रामीण इलाकों में भी हालात एक जैसे
देवास से करीब 12 किलोमीटर दूर एबी रोड पर ग्राम सिया की शराब दुकान पर भी यही स्थिति देखने को मिली. वहां न तो कोई आबकारी अधिकारी मौजूद था और न ही कोई शासकीय कर्मचारी. दुकान पूरी तरह एक प्राइवेट व्यक्ति के भरोसे चल रही थी, जो अपने मोबाइल फोन से भुगतान लेता पाया गया.