क्या ग्वालियर चंबल में 'महाराज' की जगह ले रहे 'युवराज'? जयवर्धन सिंह बोले- जनता है असली राजा

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने के बाद से जयवर्धन सिंह लगातार ग्वालियर चंबल में कांग्रेस को एक करने में लगे हुए हैं. जहां एक तरफ वह बिखरी हुई कांग्रेस को समेटने लगे हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए नेताओं की घर वापसी भी करा रहे हैं.

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कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने की एनडीटीवी से खास बातचीत

भोपाल : मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल में कांग्रेस का बड़ा और अहम चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने के बाद से लगातार यह चर्चा थी कि अब ग्वालियर चंबल में सिंधिया की जगह कौन में लेगा. लेकिन अब महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह युवराज जयवर्धन सिंह ने ली है. ग्वालियर चंबल में जयवर्धन सिंह की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और इसी के साथ उनका जनाधार भी बढ़ता दिख रहा है. इसके साथ ही वह ग्वालियर चंबल के एक सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित होते जा रहे हैं. अब कहा जाने लगा है कि महाराज को युवराज ने रिप्लेस कर दिया है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने के बाद से जयवर्धन सिंह लगातार ग्वालियर चंबल में कांग्रेस को एक करने में लगे हुए हैं. जहां एक तरफ वह बिखरी हुई कांग्रेस को समेटने लगे हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए नेताओं की घर वापसी भी करा रहे हैं. इसके साथ-साथ कुछ खांटी और मूल भाजपाइयों की भी कांग्रेस में एंट्री करा दी है. जितने भी लोग कांग्रेस छोड़ सिंधिया के साथ बीजेपी में गए थे, उनकी घर वापसी में जयवर्धन सिंह की अहम भूमिका सामने आ रही है. वहीं ग्वालियर चंबल के जितने भी नाराज भाजपा नेता कांग्रेस ज्वाइन कर रहे हैं उनमें भी कहीं ना कहीं जयवर्धन सिंह की अहम भूमिका नजर आ रही है. ग्वालियर चंबल में जहां-जहां जयवर्धन सिंह का कार्यक्रम हो रहा है वहां-वहां भारी भीड़ उमड़ रही है और उनको अपार जन समर्थन मिल रहा है जिनमें युवा विशेष रूप से शामिल हैं.

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'सिंधिया से कई गुना बड़ी है कांग्रेस की ताकत'
कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने कहा, 'मेरा 35 साल का राजनीतिक जीवन का अनुभव है और मैंने अपने अनुभव में यह देखा है कि चाहें भारतीय जनता पार्टी हो या फिर कांग्रेस, दोनों का संचालन ग्वालियर चंबल संभाग में महल से होता था. माधवराव सिंधिया कांग्रेस का संचालन करते थे और राजमाता बीजेपी का. मतलब जो आम कार्यकर्ता था वह कांग्रेस से दूर था. सिंधिया के जाते ही आम कार्यकर्ता सड़कों पर आ गया और कांग्रेस के लिए काम करने लगा.'

'लोगों को लगा कि अब सिंधिया का स्थान कौन लेगा? जयवर्धन सिंह एक ऐसे युवा हैं जिनके पास एक-एक ब्लॉक के, एक-एक कॉलेज के छात्रों के नंबर हैं. उनकी सबसे निरंतर फोन पर बात होती है.'

'अब जब-जब जो चुनाव हुए हैं, हमने देखा है कि सिंधिया से कई गुना ज्यादा कांग्रेस की ताकत बड़ी है. वहां पर जो सीट कभी सिंधिया के रहते नहीं मिल पाई, वह अब कांग्रेस को मिली है. मैं समझता हूं कि जयवर्धन सिंह सिंधिया से ज्यादा ताकतवर होकर उभरे हैं.'

'लोकतंत्र में सब समान होते हैं, जनता राजा होती है'
वही ग्वालियर चंबल में महाराज का विकल्प बनने पर जयवर्धन सिंह ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा,

'मैं नहीं मानता कि मैंने किसी की जगह ली. हर व्यक्ति की एक अलग स्वतंत्र पहचान होती है, एक चरित्र होता है. सिंधिया सिंधिया हैं, मैं जयवर्धन हूं.'

उन्होंने कहा, 'हम तो युवराज नहीं हैं. हम तो साधारण से इंसान हैं. हमें तो नहीं मालूम कौन महाराज है. हम तो एक कार्यकर्ता हैं, लोकतंत्र में सब एक समान होते हैं, जनता राजा होती है. ग्वालियर चंबल में हमारे अनेक बड़े नेता हैं. कांग्रेस में सब लोग मेहनत कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि 5 साल पहले जो मत और अधिकार जनता ने कांग्रेस को दिया था जो 15 महीने बाद ही हमसे छीन लिया गया. इस बार विधानसभा चुनाव में जनता से हमारी प्रार्थना है कि इस बार 5 साल के लिए कमलनाथ को मौका दें. आज हर वर्ग भाजपा की महंगाई और अहंकार से परेशान है. हमें पूरा विश्वास है कि इस बार हमें पूर्ण बहुमत मिलेगा और हम 160 से ज्यादा सीटें लेकर सरकार बनाएंगे.'

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