आजादी के 78 साल में पहली बार अबूझमाड़ के गांव में पहुंचे कलेक्टर ! 7 KM पैदल चलकर जाना पड़ा

Bijapur Collector: नक्सलवाद के साए से बाहर निकलते ही अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में विकास की नई उम्मीदें जग रही हैं. इसकी ताजा मिसाल बीजापुर जिले के कलेक्टर संबित मिश्रा ने पेश की है. वे अबूझमाड़ क्षेत्र के दूर दराज के इलाके में मौजूद तुलारगुफा और मंगनार गांव दल बल के साथ पहुंचे अहम ये है कि कलेक्टर और दूसरे अधिकारियों ने गांव तक पहुंचे के लिए पहले बाइक का सहारा लिया फिर करीब 5-7 किलोमीटर तक पैदल भी चले.

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Bijapur Collector Remote Village: कल्पना कीजिए और आप किसी दूर-दराज के गांव में रहते हैं जहां तक पहुंचना आम तौर पर काफी मुश्किल भरा हो...उसी गांव में आपके दरवाजे पर अचानक जिले के कलेक्टर और दूसरे बड़े अधिकारी दस्तक दें तो आपको कैसा लगेगा? जाहिर है चौंक जाएंगे...कुछ ऐसा ही हुआ छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र के दूर दराज के इलाके में मौजूद तुलारगुफा और मंगनार गांव में. गुरुवार को यहां कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे सहित प्रशासन की पूरी टीम 5-7 किलोमीटर पैदल चल कर पहुंची. इससे पहले वे जिला मुख्यालय से वहां तक बाइक से गए जहां तक वाहन जा सकता था...बाकी सफर पैदल तय किया. अहम ये है कि  आज़ादी के बाद यह पहला मौका था जब कोई कलेक्टर इस इलाके तक पहुंचा. 

दरअसल सरकार द्वारा नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च तय किए जाने के बाद इसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है. मंगनार गांव के ग्रामीणों ने तुलारगुफा तक सड़क निर्माण की मांग की थी.  ग्रामीणों की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर बीजापुर संबित मिश्रा,जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे सहित प्रशासन की पूरी टीम दुर्गम क्षेत्र की ओर रवाना हुई.   

Bijapur Collector IAS Sambit Mishra and CEO Namrata Choube in Abujhmad            Photo Credit: NDTV

बाइक से सफर, फिर पहाड़ों में पैदल यात्रा

प्रशासनिक टीम ने पहले बाइक से यात्रा शुरू की,लेकिन आगे पहाड़ी रास्ते,उबड़-खाबड़ भूभाग और नदी-नालों के कारण लगभग 5 से 7 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ा. इस दौरान भैरमगढ़ थाने के जवान,भैरमगढ़ एसडीएम,जनपद सीईओ,जनपद सदस्य,सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे. आपको बता दें कि ये रास्ते सामान्य रास्ते नहीं हैं. इन रास्तों में कई जगह ऐसे हैं जहां अभी भी नक्सलियों के स्मारक मौजूद हैं जो यहां की पुरानी स्थिति की गवाही दे रहे हैं.  

ग्रामीणों से संवाद, विकास का भरोसा

तुलारगुफा और मंगनार गांव पहुंचकर कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. सड़क,शिक्षा,स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं. कलेक्टर संबित मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की सभी जायज मांगों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा और सड़क निर्माण की दिशा में शीघ्र कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन की इस पहल से ग्रामीणों में उत्साह और विश्वास दोनों नजर आया. 

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Bijapur Collector IAS Sambit Mishra and CEO Namrata Choube in Abujhmad            Photo Credit: NDTV

तुलारगुफा में मौजूद है प्राचीन शिव मंदिर

तुलारगुफा सिर्फ भौगोलिक ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल है. यहां बेहद प्राचीन शिवलिंग मौजूद है.शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध है, जो इस स्थान को और भी विशेष बनाता है.खास बात यह है कि शिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.  यही वजह है कि प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर शिवलिंग के दर्शन किए.  

Bijapur Collector IAS Sambit Mishra and CEO Namrata Choube in Abujhmad           Photo Credit: NDTV

नक्सल विरोधी अभियानों का असर

सनद रहे कि बीते एक वर्ष में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए व्यापक नक्सल विरोधी अभियानों का ही परिणाम है कि अबूझमाड़ इलाके में नक्सलियों की पकड़ कमजोर पड़ी है. जवानों ने नक्सलियों को लगातार बड़े झटके दिए, जिससे उनका नेटवर्क बिखर गया है. नक्सल संगठन का जनरल सेक्रेटरी बसवराजू भी इसी क्षेत्र के जंगल में मारा गया.

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दंतेवाड़ा की थुलथुली मुठभेड़ और कुख्यात नक्सली लीडर रूपेश का हथियार सहित आत्मसमर्पण भी इसी इलाके से जुड़ी बड़ी घटनाएं रहीं. इन सफलताओं के बाद अब ग्रामीण बिना डर के विकास की मांग कर रहे हैं. प्रशासन भी सक्रियता के साथ दुर्गम इलाकों तक पहुंच रहा है. कलेक्टर का पैदल सफर इस बात का प्रतीक है कि अब अबूझमाड़ में बंदूक के बजाय विकास की राह खुलेगी.
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