मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर निशाना साधा है. सीएम ने शनिवार को कहा कि इस आयोजन से पहले राहुल गांधी को कांग्रेस की पिछली सरकारों द्वारा युवाओं से किए गए अन्याय के लिए माफी मांगनी चाहिए.
इंदौर में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर राहुल गांधी मध्यप्रदेश आ रहे हैं, तो उनका स्वागत है. लेकिन कांग्रेस की पिछली सरकारों ने राज्य के युवाओं के साथ जो अन्याय किया, वह पहले उसके लिए उनसे क्षमा-याचना करें.''
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में 1956 से 2003 तक कांग्रेस के शासनकाल में युवाओं के साथ-साथ किसानों, महिलाओं और अन्य वर्गों की स्थिति बेहद खराब थी. उस दौर में काफी बेरोजगारी थी और प्रति व्यक्ति आय केवल 11,700 रुपये थी, जो अब भाजपा के शासनकाल में बढ़कर 1.67 लाख रुपये हो गई है.
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम 19 सितंबर को
बता दें कि कांग्रेस ने इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए पहले 12 सितंबर की तारीख तय की थी. बाद में यह कहते हुए तारीख बदलकर 19 सितंबर की गई कि राज्य सरकार ने शहर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजन की अनुमति नहीं दी. अब यह कार्यक्रम किसी अन्य स्थल पर आयोजित किया जाएगा.
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कांग्रेस का पलटवार, रागिनी नायक ने लगाए आरोप
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंदौर में प्रस्तावित इस कार्यक्रम में अड़ंगे डाल रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा के इन हथकंडों का कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि युवा सत्तारूढ़ दल की नीतियों के खिलाफ हैं.
रागिनी नायक ने जनगणना के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि 2027 की जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए तो अधिसूचित सूचियों का उपयोग होगा, लेकिन ओबीसी और सामान्य वर्ग के लिए 'ओपन एंडेड' जाति प्रविष्टियों का प्रावधान रखा गया है. इससे एक ही जाति कई नामों और उपजातियों में दर्ज हो जाएगी, जिससे आंकड़ों में भारी गड़बड़ी हो सकती है.
कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि देश की पहली डिजिटल जनगणना में सभी वर्गों की जातियां दर्ज करने के लिए राज्यवार सत्यापित 'ड्रॉपडाउन' सूची का उपयोग किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जान-बूझकर सही तरीके से जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती.