Kuno Cheetah News Today: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है. दरअसल, प्रोजेक्ट चीता के तहत दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी' ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है. यह कूनो में चीते का नौवां सफल प्रसव है और इस उपलब्धि के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है. यह घटना केवल एक प्रसव नहीं, बल्कि देश के वन्य जीव संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता का प्रतीक मानी जा रही है.
भारत में लगभग 70 वर्ष पहले चीते विलुप्त हो चुके थे. देश में फिर से चीतों को बसाने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की गई थी. इसके तहत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीतों को लाकर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया. इसी कड़ी में दक्षिण अफ्रीका से लाई गई गामिनी अब दूसरी बार मां बनी है. यह दर्शाता है कि कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है और पुनर्वास योजना सही दिशा में आगे बढ़ रही है.
चीतों के पुनर्स्थापन का सशक्त केंद्र मध्यप्रदेश…
अत्यंत हर्ष का विषय है कि प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता ‘गामिनी' ने 3 शावकों को जन्म दिया है। श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में आए चीतों के तीन वर्ष पूर्ण होने के साथ यह 9वां सफल प्रसव है।… pic.twitter.com/vr24Qcuf7Uअब तक 27 शावकों का जन्म
गामिनी के तीन नए शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित चीता शावकों की संख्या 27 हो गई है. यह आंकड़ा बताता है कि चीता पुनर्वास परियोजना अब स्थिर और सफल चरण में प्रवेश कर चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन्य जीव प्रजाति का नए वातावरण में सफल प्रजनन उस परियोजना की असली परीक्षा होती है. कूनो में लगातार सफल प्रसव इस बात का प्रमाण है कि यहां का इकोसिस्टम चीतों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है.
Advertisementमुख्यमंत्री ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है. उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह प्रदेश और देश के लिए गौरव का क्षण है. उनके अनुसार, भारत में चीतों की संख्या 38 तक पहुंचना वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है.
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चीता केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन की श्रृंखला का अहम हिस्सा है. शीर्ष शिकारी होने के कारण यह पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. गामिनी के शावकों का जन्म इस बात का संकेत है कि भारत ने विलुप्ति के कगार से एक प्रजाति को वापस लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. कूनो नेशनल पार्क अब वैश्विक स्तर पर चीता पुनर्वास की एक सफल मिसाल बनता जा रहा है.Advertisementये भी पढ़ें- भोजशाला विवाद में बड़ा मोड़: अब मुख्य न्यायाधीश की पीठ करेगी सुनवाई, इंदौर से जबलपुर शिफ्ट हुआ मामला