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त्योहार से पहले भोपाल में सीलिंग पर दो फाड़: व्यापारी सड़कों पर, रहवासी बुलडोजर की मांग पर अड़े 

भोपाल में सीलिंग कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. एक तरफ व्यापारी मिक्स लैंड यूज नियम लागू करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं रहवासी अवैध कमर्शियल निर्माणों पर सख्त कार्रवाई और बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे हैं.

त्योहार से पहले भोपाल में सीलिंग पर दो फाड़: व्यापारी सड़कों पर, रहवासी बुलडोजर की मांग पर अड़े 
फाइल फोटो

भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह शहर में दो अलग-अलग वर्गों के बीच टकराव का कारण बन चुकी है. एक ओर व्यापारी हैं, जो त्योहारों के सीजन में दुकानों को सील करने के नोटिस मिलने से नाराज हैं और सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं. दूसरी ओर कॉलोनियों में रहने वाले रहवासी हैं, जो रिहायशी इलाकों में बढ़ते व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. शहर के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे प्रदर्शन ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है.  

रोशनपुरा से शुरू हुआ विरोध, पूरे शहर में फैला

सीलिंग के विरोध की शुरुआत रोशनपुरा चौराहे पर हुए सामूहिक प्रदर्शन से हुई थी. इसके बाद यह विरोध धीरे-धीरे शहर के अन्य इलाकों तक पहुंच गया. व्यापारियों का कहना है कि जिस समय बाजार में सबसे ज्यादा ग्राहकी होती है, उसी समय नोटिस जारी करना उनके कारोबार पर सीधा असर डाल रहा है.

बागसेवनिया और अवधपुरी के बाद आनंद नगर में बड़ा प्रदर्शन

सबसे पहले बागसेवनिया क्षेत्र में व्यापारियों ने बाजार बंद कर रैली निकाली. इसके बाद अवधपुरी में करीब दो हजार दुकानों के शटर कुछ घंटों के लिए बंद रहे. शनिवार को आनंद नगर में विरोध का सबसे बड़ा असर देखने को मिला. यहां करीब तीन हजार दुकान संचालकों ने अपनी दुकानें बंद रखकर नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया.

शटर डाउन कर जताई नाराजगी

आनंद नगर मार्केट में सैकड़ों व्यापारियों ने एक साथ शटर डाउन कर विरोध दर्ज कराया. हाथों में तख्तियां लेकर व्यापारी पूरे बाजार में रैली निकालते नजर आए. प्रदर्शन में केवल दुकान मालिक ही नहीं, बल्कि दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए. उनका कहना है कि यदि कार्रवाई जारी रही तो हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है.

त्योहार के समय कार्रवाई पर व्यापारियों की आपत्ति

व्यापारियों का आरोप है कि नगर निगम ने कार्रवाई के लिए गलत समय चुना है. उनका कहना है कि रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के दौरान बाजार में कारोबार चरम पर रहता है. ऐसे समय में सीलिंग नोटिस जारी होने से आर्थिक नुकसान होना तय है. व्यापारी संघ का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो दुकानदारों के साथ-साथ कर्मचारियों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा.

रहवासियों ने भी खोला मोर्चा

जहां व्यापारी सीलिंग के विरोध में सड़कों पर हैं, वहीं कॉलोनियों में रहने वाले रहवासी भी अब खुलकर सामने आ गए हैं. उनका कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे व्यावसायिक उपयोग से पार्किंग, ट्रैफिक और सुरक्षा जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं. रहवासियों का आरोप है कि कई स्थानों पर नियमों को दरकिनार कर मकानों को दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदला जा रहा है.

टॉर्च मार्च निकालकर की कार्रवाई की मांग

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले रहवासियों ने विरोध का नया तरीका अपनाया है. समिति के नेतृत्व में टॉर्च लाइट मार्च आयोजित किया गया, जिसमें लोगों ने अवैध व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई. रहवासियों का कहना है कि कॉलोनियों का स्वरूप लगातार बदल रहा है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो रिहायशी क्षेत्रों की मूल पहचान खत्म हो जाएगी.

आखिर क्या है मिक्स लैंड यूज का विवाद?

पूरा विवाद मिक्स लैंड यूज व्यवस्था को लेकर है. भोपाल की कई रिहायशी कॉलोनियों में मकानों का उपयोग दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. नगर निगम इसे नियमों के खिलाफ मानते हुए सीलिंग की कार्रवाई कर रहा है. दूसरी ओर व्यापारी मांग कर रहे हैं कि इंदौर और दिल्ली की तरह भोपाल में भी मिक्स लैंड यूज का प्रावधान लागू किया जाए. उनका तर्क है कि तय शुल्क और नियमों के तहत रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति मिलने से विवाद खत्म हो सकता है.

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