लोधी‑लोधा राजपूत समाज कार्यक्रम: सीएम यादव दे रहे थे भाषण, मंच पर बेहोश हो गए पुलिस अधिकारी 

भोपाल के जम्बूरी मैदान में राजपूत समाज के कार्यक्रम के दौरान उस वक्त अफरा‑तफरी मच गई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भाषण के बीच मंच पर तैनात एक पुलिस अधिकारी बेहोश हो गए. लोधी‑लोधा राजपूत समाज द्वारा आयोजित शौर्य यात्रा में कई मंत्री, विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती मौजूद रहीं.

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Police Officer Fainted On Stage: भोपाल के जम्बूरी मैदान में चल रहे लोधी‑लोधा राजपूत समाज के बड़े कार्यक्रम के दौरान उस वक्त सब हैरान हो गए, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच से संबोधन दे रहे थे. इसी दौरान सीएम सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े. मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत संभाला और अधिकारी को प्राथमिक उपचार दिलाया गया. इसके बाद कार्यक्रम आगे जारी रहा.

भोपाल में आयोजित हुआ शौर्य यात्रा कार्यक्रम

दरअसल, राजधानी भोपाल के जम्बूरी मैदान में महाराजा हिरदेशाह लोधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शौर्य यात्रा का भव्य आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम अखिल भारतीय लोधी‑लोधा राजपूत समाज के तत्वावधान में हुआ, जिसमें प्रदेशभर से समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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मंत्री, विधायक और समाज के पदाधिकारी रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, युवा एवं पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे, पिछोर विधायक प्रीतम लोधी, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लम्बरदार, बड़ा मलहरा विधायक रामसिया भारती, बरगी विधायक नीरज सिंह ठाकुर मौजूद रहे. इसके अलावा लोधी‑लोधा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जालम सिंह पटेल और राजा हिरदेशाह के वंशज कौशलेन्द्र सिंह भी मंच पर उपस्थित रहे.

उमा भारती का भावुक और ऐतिहासिक संबोधन

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपने संबोधन में राजा हिरदेशाह के शौर्य और रणनीति को याद करते हुए कहा कि उनका युद्ध करने का तरीका छत्रपति शिवाजी महाराज से मिलता‑जुलता था. उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती से आजादी की जो चिंगारी जली थी, उसकी पूर्ण आहुति वर्ष 1947 में हुई.

आजादी की दूसरी लड़ाई की चर्चा

उमा भारती ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने बलिदान की पूरी तैयारी की थी, जबकि आजादी का श्रेय बाद में गांधी जी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह को मिला. उन्होंने आगे कहा कि 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली, तब एक अमेरिकी अखबार ने लिखा था कि 1947 में भारत की जमीन आजाद हुई थी और अब भारत का मूल आजाद हुआ है.

इतिहास को शिक्षा से जोड़ने की घोषणा

कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा भी की गई कि राजा हिरदेशाह समेत 1857 के क्रांतिकारियों के जीवन और योगदान पर शोध कर उन्हें पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा. साथ ही उनके नाम पर शिक्षण संस्थानों के नाम रखे जाने की भी जानकारी दी गई.

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