भोजशाला: कमाल मौला दरगाह पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल, एक ओर पूजा तो दूसरी ओर हुआ संदल शरीफ  

धार की भोजशाला–कमाल मौला दरगाह परिसर में शुक्रवार को सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल देखने को मिली. एक ओर जहां पूजा-अर्चना हुई, वहीं दूसरी ओर संदल शरीफ का आयोजन किया गया. दोनों समुदायों ने शांति और भाईचारे के साथ धार्मिक कार्यक्रम संपन्न किए.

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Bhojshala Dhar Communal Harmony: धार की भोजशाला–कमाल मौला दरगाह परिसर में शुक्रवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द की एक खूबसूरत मिसाल पेश की. एक ही जगह पर जहां एक ओर पूजा-अर्चना हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ दरगाह पर संदल शरीफ की रस्म अदा की जा रही थी. संवेदनशील माने जाने वाले इस परिसर में दोनों समुदायों ने शांति और आपसी समझ के साथ अपने-अपने धार्मिक कार्यक्रम पूरे किए, जिससे पूरे शहर में भाईचारे का संदेश गया.

एक ही परिसर में पूजा और संदल शरीफ

शुक्रवार को भोजशाला परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. वहीं परिसर से सटे बाबा कमाल मौला की दरगाह पर संदल शरीफ का आयोजन हुआ. दोनों कार्यक्रम अपने-अपने समय और तरीके से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए. यह नजारा लंबे समय बाद देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान खींचा.

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दरगाह पर उमड़ा मुस्लिम समाज

4 जिलहिज्जा के मौके पर दरगाह पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे. यहां चादर चढ़ाई गई और अमन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी गई. उर्स कमेटी के सचिव सैय्यद रफीफुदीन कारी ने बताया कि संदल शरीफ के साथ लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

सौहार्द का दिया गया संदेश

इस मौके पर दोनों समुदायों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और समझदारी दिखाई. आयोजकों ने भी लोगों से अपील की कि वे इसी तरह शांति और भाईचारे का माहौल बनाए रखें. पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह का तनाव देखने को नहीं मिला, जो अपने आप में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

प्रशासन रहा पूरी तरह सतर्क

संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रहे. पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे. प्रशासन की मौजूदगी और सतर्कता के चलते दोनों कार्यक्रम बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.