Bhind Blacklisted Companies: भिंड जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में लेबर सप्लाई करने वाली कंपनियों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है. जिन दो कंपनियों (लक्ष्य सिक्योरिटी एंड मैनपावर सर्विसेज और सेंगर सिक्योरिटी एंड लेबर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) को कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था, वही कंपनियां अब भी जिले के अस्पतालों में काम कर रही हैं. आरोप है कि यह सब स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है.
Bhind Blacklisted Companies: भिंड जिला अस्पताल
गोहद में वेतन घोटाले से शुरू हुआ मामला
मामला तब उजागर हुआ जब गोहद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कर्मचारियों ने अपने मानदेय में अनियमितता की शिकायत की थी. कर्मचारियों का कहना था कि शासन द्वारा निर्धारित 10 हजार रुपये से अधिक वेतन तय है, लेकिन उन्हें सिर्फ 6 से 7 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं. इस शिकायत को लेकर गोहद क्षेत्र के कांग्रेस विधायक केशव देसाई को ज्ञापन सौंपा गया.
Bhind Blacklisted Companies: सदन में इन्होंने उठाया सवाल
विधानसभा में उठा मामला, जांच समिति ने दी पुष्टि
विधायक केशव देसाई ने इसे विधानसभा में उठाया, जिसके बाद प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए. शासन स्तर पर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया गया. कंपनियों ने डाटा एंट्री ऑपरेटर, सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड के वेतन में कटौती की. ये शिकायतें तथ्यात्मक और सही पाई गईं. इस आधार पर दोनों कंपनियों को 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का आदेश जारी किया गया.
Bhind Blacklisted Companies: सिक्योरिटी गार्ड
ब्लैकलिस्टिंग के बाद भी जारी है काम
जांच के बाद कार्रवाई तो हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं. बताया जा रहा है कि भिंड जिला अस्पताल सहित कई स्वास्थ्य संस्थानों में आज भी इन्हीं कंपनियों के कर्मचारी काम कर रहे हैं. सिर्फ जिला अस्पताल में ही करीब आधा सैकड़ा कर्मचारी इन कंपनियों द्वारा तैनात हैं. यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जब कंपनियां ब्लैकलिस्ट हो चुकी हैं, तो फिर उन्हें अस्पतालों में काम जारी रखने की अनुमति किसने दी?
स्वास्थ्य विभाग की सफाई; "नई कंपनी की प्रक्रिया पूरी"
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने ऑफ कैमरा बयान देते हुए कहा कि नई कंपनी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. जैसे ही औपचारिकताएं पूरी होंगी, व्यवस्था बदली जाएगी. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि टेंडर प्रक्रिया के बाद भी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के कर्मचारी अस्पतालों में क्यों काम कर रहे हैं.
CMHO की चुप्पी बढ़ा रही सवाल
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जे.एस. यादव ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की. मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर भी उन्होंने चुप्पी साध ली. विभाग की इस चुप्पी ने यह सवाल और गहरा कर दिया है कि आखिर इन कंपनियों को संरक्षण कौन दे रहा है?
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