Madhya Pradesh Hindi News: भिंड जिले में आबकारी विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. दरअसल, कच्ची शराब बेचने का वीडियो वायरल होने के बाद अचानक आबकारी और पुलिस महकमा हरकत में आया और लहार के दबोह थाना क्षेत्र के कंजर डेरा पर छापेमारी की गई. लेकिन इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि वर्षों से चल रहे कच्ची शराब के बड़े कारोबार पर प्रशासन ने सिर्फ औपचारिकता निभाई है.
एक महिला गिरफ्तार
छापेमारी के दौरान आबकारी विभाग और दबोह थाना पुलिस की टीम ने मौके से गुड़लाहन से निर्मित हाथ भट्टी की कच्ची शराब के मात्र 30 पाउच और लगभग 5 लीटर शराब जब्त की. इस दौरान एक महिला को गिरफ्तार किया गया, जिसकी पहचान सुष्मिता कंजर के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि पकड़ी गई शराब की कुल कीमत सिर्फ 1600 रुपये के आसपास है. इसके बावजूद विभाग ने महिला पर मामूली धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई को बड़ी सफलता बताने की कोशिश की.
कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग द्वारा आरोपी महिला के साथ फोटो खिंचवाकर मीडिया में इसे बड़ी उपलब्धि की तरह प्रचारित किया गया, जिसको लेकर अब विभाग पर “झूठी वाहवाही लूटने” के आरोप लग रहे हैं.
सालों से चल रहा था बड़ा अवैध शराब का नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कंजर डेरा लंबे समय से कच्ची शराब का बड़ा अड्डा बना हुआ था. यहां खुलेआम अवैध शराब की बिक्री होती थी. छोटे -छोटे सात मकानों में व्यवस्थित तरीके से शराब के पाउच तैयार कर बेचे जाते थे. बताया जा रहा है कि पुरुष दिन में घर छोड़ देते थे और महिलाएं व बच्चे चोरी-छुपके शराब के कारोबार को अंजाम देते थे. ग्राहक बुलाने के लिए घर के बाहर चारपाई पर थैले में शराब के पाउच रख दिए जाते थे, जिन्हें देखकर ग्राहक पहुंचते थे और 30 रुपये प्रति पाउच के हिसाब से शराब खरीदते थे.
हर घर के लिए तय था शराब बेचने का सिस्टम
जानकारी के अनुसार कंजर डेरा में कुल 7 मकान हैं, और शराब बेचने के लिए बाकायदा सिस्टम बना हुआ था. एक दिन एक ही घर शराब बेचता था, बाकी 6 घर उस दिन शराब नहीं बेचते थे. अगले दिन दूसरे घर को मौका दिया जाता था. इस तरह सभी को बारी-बारी से शराब बेचने का अवसर मिलता था. जिससे आपस मे कोई विवाद या झगड़ा भी नहीं होता था.
बीहड़ों में बनती थी शराब
सूत्र बताते हैं कि अवैध शराब पुरुष बीहड़ों में बनाते थे. इसके बाद रात में शराब घर लाई जाती थी और पाउच तैयार किए जाते थे. तैयार शराब को घर के पास खेतों में गड्ढे खोदकर छिपा दिया जाता था.
ठेकेदारों पर भी गंभीर आरोप
इस मामले में बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि आसपास के शराब ठेकेदार भी इस कच्ची शराब के नेटवर्क से जुड़े हुए थे. आरोप है कि ठेकेदार कच्ची शराब को प्लास्टिक की बोतलों और पाउच में पैक कर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले विक्रेताओं तक पहुंचाते थे. कम कीमत में मिलने वाली कच्ची शराब को 2 से 4 गुना दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था.
जो ठेकेदार से शराब नहीं खरीदता, उसे पकड़वाने की धमकी
सूत्रों का कहना है कि जो विक्रेता ठेकेदार से शराब नहीं खरीदता था, उसे पुलिस और आबकारी विभाग से पकड़वाने का डर दिखाया जाता था. इस पूरे नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री लगातार चल रही थी.
आबकारी इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी पर मिलीभगत का आरोप
इस पूरे मामले में अब आबकारी इंस्पेक्टर अजीत यादव और दबोह थाना प्रभारी पर भी मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वर्षों से अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, तो आबकारी और पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी. अब सवाल यह है कि वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई सिर्फ 30 पाउच और 5 लीटर शराब तक ही क्यों सीमित रही, जबकि यहां बड़े पैमाने पर अवैध शराब का कारोबार चलने की बात सामने आ रही है. फिलहाल इस मामले में कार्रवाई जारी बताई जा रही है, लेकिन लोगों की मांग है कि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो.
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