दलित पेशाब कांड: भीम आर्मी का आपत्तिजनक वीडियो वायरल, पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड पर 

Bhind Dalit case में Bhim Army viral video सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. वीडियो में अभद्र भाषा और सरकार व police administration alert को लेकर विवाद बढ़ गया है. caste tension in Madhya Pradesh को देखते हुए पुलिस ने social media monitoring तेज कर दी है.

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Bhind Dalit urine incident: भिंड दलित पेशाब कांड मामले ने एक बार फिर माहौल को गरमा दिया है. सोशल मीडिया पर भीम आर्मी का एक आपत्तिजनक और उग्र वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें संगठन के कार्यकर्ता खुलकर पुलिस प्रशासन और भाजपा सरकार पर हमला बोलते दिखाई दे रहे हैं.

वीडियो में इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा को लेकर अब पुलिस ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है. पुलिस ने आमजन से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी तरह की भ्रामक या उकसाने वाली पोस्ट पर विश्वास न करें और न ही ऐसी सामग्री को शेयर करें.

थाने के बाहर हंगामा, तीखी नोकझोंक और नारेबाजी

जानकारी के अनुसार, यह वीडियो उसी दिन का बताया जा रहा है, जब घटना के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता थाने के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे. इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच जमकर बहस हुई और कई बार बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. वीडियो में “बीजेपी सरकार मुर्दाबाद” जैसे नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे हैं.

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दलित ड्राइवर पर हमला और पेशाब पिलाने की घटना के बाद पुलिस एक घंटे बाद पहुंची. उनके अनुसार, अगर भीम आर्मी समय पर मौके पर न पहुंचती तो पीड़ित की जान जा सकती थी. उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि आरोपियों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई.

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राजनीतिक निशाने पर आए हेमंत कटारे

वीडियो में भीम आर्मी के कार्यकर्ता उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे पर भी हमलावर नजर आ रहे हैं. उनका कहना था कि “हेमंत कटारे को अटेर से इसलिए विधायक बनाया गया कि वह दलितों पर अत्याचार करे.” यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है.

पुलिस को खुली चेतावनी, NSA लगाने की मांग

कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि “अब कोई समझौता नहीं होगा.” उन्होंने मांग की कि आरोपियों पर NSA, अपहरण, 377 और लूट की धाराएं लगाई जाएं, यहां तक कि उन्हें नंगा करके जुलूस निकालने की मांग भी रखी गई. वीडियो में कुछ कार्यकर्ता अत्यधिक अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते दिखे.

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पुलिस-प्रशासन हाई अलर्ट पर

यह वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत इसकी जांच शुरू कर दी है. जिला प्रशासन को आशंका है कि ऐसा उकसाने वाला कंटेंट जातीय तनाव को और भड़का सकता है, इसलिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को तेज कर दिया गया है. पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ और अफवाह फैलाने वाली पोस्टों पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है.

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कानूनी कार्रवाई की जाएगी- पुलिस

पुलिस ने आमजन से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी तरह की भ्रामक या उकसाने वाली पोस्ट पर विश्वास न करें और न ही ऐसी सामग्री को साझा करें. सायबर सेल ने सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है. पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), व्हाट्सएप समूहों और रील वीडियो की गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है. अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि “जो भी व्यक्ति भड़काऊ, जातीय या संप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.” 

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