हिम्मत और जज्बे की मिसाल: मौत के जबड़े से लौट आया किसान, भालू के हमले के बाद ऐसे बचाई जान

Panna Tiger Reserve: हमले के दौरान बेटू आदिवासी पूरी तरह घायल हो चुके थे. शरीर खून से लथपथ था और असहनीय दर्द का सामना कर रहे थे. ऐसे में उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए खुद को मृत होने का नाटक किया. सांसें रोककर वह जमीन पर बिल्कुल निश्चल पड़े रहे. कुछ देर बाद भालू उन्हें मरा समझकर जंगल की ओर लौट गए. यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.

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Panna Tiger Reserve:  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना (Panna) जिले के जंगल इन दिनों डर और दहशत की पहचान बनते जा रहे हैं. एक दिन पहले यहां तेंदुए के हमले ने मासूम की जान ले ली. वहीं, अब उत्तर वन मंडल के पन्ना रेंज के तिलंगवा इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है. दरअसल, यहां एक 64 वर्षीय किसान मौत से जंग लड़कर किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा.

भालुओं के कुनबे ने बोला हमला

तिलंगवा निवासी बेटू आदिवासी रोजमर्रा की जरूरत के लिए जंगल की सीमा पर लकड़ी लेने गए थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर मौत से सामना करा देगा. दरअसल, उनके जंगल में घुसते ही अचानक भालुओं का पूरा परिवार उनके सामने आ गया. इससे पहले कि वह संभल पाते, भालुओं ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया. नुकीले पंजों और दांतों से इन भालुओं ने बुजुर्ग किसान को बुरी तरह नोच डाला.

सांसें रोककर बचाई जान

हमले के दौरान बेटू आदिवासी पूरी तरह घायल हो चुके थे. शरीर खून से लथपथ था और असहनीय दर्द का सामना कर रहे थे. ऐसे में उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए खुद को मृत होने का नाटक किया. सांसें रोककर वह जमीन पर बिल्कुल निश्चल पड़े रहे. कुछ देर बाद भालू उन्हें मरा समझकर जंगल की ओर लौट गए. यही पल उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.

घायल हालत में घर तक पहुंचे

भालुओं के जाते ही गंभीर रूप से घायल किसान ने हिम्मत नहीं हारी. दर्द और कमजोरी के बावजूद वह किसी तरह घिसटते हुए जंगल से बाहर निकले और अपने घर तक पहुंचे. परिजनों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है. डॉक्टरों के अनुसार, समय पर मदद मिलने से उनकी जान बच सकी.

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घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पीड़ित परिवार को तात्कालिक राहत दी गई. रेंजर अजय वाजपेयी ने बताया कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जा रही है. वहीं, सरपंच पति गोलू तिवारी का कहना है कि लगातार वन्यजीवों के हमलों से ग्रामीणों में भारी डर है. उन्होंने बताया कि कल तेंदुए का हमला और आज भालुओं की दरिंदगी का ये सिलसिला कई सवाल खड़े करता है. आखिर पन्ना के जंगलों और गांवों में इंसानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? और यह खूनी संघर्ष कब थमेगा?

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