मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर पहुंचे अभिनेता आशुतोष राणा ने वर्तमान दौर में सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चल रही टीका-टिप्पणियों और अपशब्दों के चलन पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत का नाम लिए बिना मौजूदा बयानों और प्रतिक्रियाओं के दौर को बहुत ही सधे हुए शब्दों में परिभाषित किया.
अपशब्दों और प्रतिक्रियाओं पर व्यक्तिगत राय
मीडिया से बातचीत के दौरान आशुतोष राणा ने कहा कि किसी के बयान पर प्रतिक्रिया देना पूरी तरह से व्यक्ति के अपने नजरिए और सोच पर निर्भर करता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई किसी अन्य व्यक्ति को अपशब्द बोलता है तो हमें लगता है कि ऐसा नहीं होना चाहिए और हमें सकारात्मक प्रतिक्रिया देनी चाहिए, लेकिन जब वही अपशब्द सीधे आपके खिलाफ इस्तेमाल होने लगते हैं तो क्या तब भी हमारा यही विचार रहता है कि अपशब्द नहीं बोलना चाहिए? अभिनेता ने कहा कि यह पूरी तरह से व्यक्तिगत चीजों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
उन्होंने पत्रकारिता और पिचकारिता को परिभाषित करते हुए कहा कि कहीं पिचकारीता हो रही है तो उसका मतलब पत्रकारिता पर सवाल उठे.
'टीका' और 'टिप्पणी' का अद्भुत दर्शन
वर्तमान समय में चल रही टीका-टिप्पणियों के माहौल को समझाते हुए आशुतोष राणा ने इसके गहरे मायने बताए. उन्होंने कहा कि हमारे पास 'टीका' भी है और 'टिप्पणी' भी. टीका एक बहुत ही अद्भुत चीज है, जैसे पवित्र ग्रंथों—गीता जी और रामायण पर लिखी गई टीकाएं होती हैं. वहीं, टिप्पणी भी एक अद्भुत भाव है, जिस पर लोग रामायण, महाभारत और गीता जी तक पर बातें करते हैं. उन्होंने अंत में कहा कि यह पूरी तरह से हम पर निर्भर करता है कि हम टीका और टिप्पणी जैसे कल्याणकारी भावों को समाज के सामने किस रूप में और किस तरीके से प्रस्तुत करते हैं.