कथित धर्मांतरण विवाद के बीच धार्मिक स्थल पर प्रशासन ने चला दिया बुलडोजर, तीन घंटे में ढहा दिया विवादित ढांचा

Bulldozer Action: विवाद झखौरा निवासी कामता चौधरी और उनके रिश्तेदार लालमन चौधरी उर्फ अब्दुल रहमान के बीच जमीन के दावे को लेकर सामने आया था. आरोप है कि इसी विवादित भूमि पर गुंबदनुमा ढांचा तैयार किया जा रहा था, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई. बस इसी वजह से इस धार्मिक स्थल को प्रशासन की ओर ढहा दिया गया.

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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के सतना (Satna) जिले के धारकुंडी थाना क्षेत्र के ग्राम झखौरा में रविवार को प्रशासन ने एक निर्माणाधीन विवादित भवन पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया. इस भवन में कथित रूप से एक धार्मिक संरचना तैयार की जा रही थी, जिसको लेकर पिछले कुछ दिनों से गांव में विवाद की स्थिति बनी हुई थी. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच करीब तीन घंटे चली कार्रवाई में जेसीबी मशीन की मदद से पूरे ढांचे को गिरा दिया गया.

कार्रवाई के दौरान मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, तहसीलदार बिरसिंहपुर शैलेन्द्र शर्मा, तहसीलदार मझगवां हिमांशु शुक्ला, एसडीओपी चित्रकूट सहित राजस्व और पुलिस विभाग के कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे. क्षेत्र में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.

स्वामित्व विवाद से शुरू हुआ मामला

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक संबंधित भवन को 5 जनवरी को ही सीज कर दिया गया था. यह कार्रवाई संपत्ति स्वामित्व को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद की गई. आदेश में कहा गया था कि स्वामित्व का अंतिम निर्णय होने तक स्थल की निगरानी ग्राम पंचायत की ओर से की जाएगी. विवाद झखौरा निवासी कामता चौधरी और उनके रिश्तेदार लालमन चौधरी उर्फ अब्दुल रहमान के बीच जमीन के दावे को लेकर सामने आया था. आरोप है कि इसी विवादित भूमि पर गुंबदनुमा ढांचा तैयार किया जा रहा था, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

धर्मांतरण मामले से भी जुड़ा क्षेत्र

इसी इलाके में पूर्व में धर्मांतरण से जुड़े एक प्रकरण में पुलिस कार्रवाई कर चुकी है. 31 दिसंबर को हुई कार्रवाई में पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. पुलिस ने जांच के दौरान धार्मिक साहित्य, बैनर, झंडे और एक मोबाइल फोन जब्त किया था. जब्त मोबाइल की फॉरेंसिक जांच जारी है और मामले के कुछ तार बाहरी राज्यों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है.

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प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजस्व अभिलेखों, शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए विधिसम्मत तरीके से ढांचा हटाया गया है. मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और जांच के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे.

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