Ujjain के डिप्टी कलेक्टर को लगा बड़ा झटका, अधीनस्थ कर्मचारी से दुष्कर्म मामले में 10 साल की सज़ा

Rape Case: पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था. लंबी सुनवाई और सबूतों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाया. न्यायालय ने कहा कि पद का दुरुपयोग कर अधीनस्थ महिला के साथ किया गया अपराध अत्यंत गंभीर है और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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Rape Accused SDM Sentenced to 10 years Jail: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़वानी (Badwani) के तत्कालीन एसडीएम अभय सिंह खरारी को अधीनस्थ महिला कर्मचारी के साथ यौन अपराध के मामले में दोषी करार दिया गया है. माननीय तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेखा चंद्रवंशी की अदालत ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में 10 वर्ष और 1 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है. इसके साथ ही न्यायालय ने उन पर कुल 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. फिलहाल, अभय सिंह खरारी डिप्टी कलेक्टर के पद पर उज्जैन में पदस्थ हैं. 

अतिरिक्त लोक अभियोजन अधिकारी शिवपाल सिंह सिसोदिया के अनुसार, यह मामला वर्ष 2016 से जुड़ा है, जब आरोपी उज्जैन में एसडीएम पद पर पदस्थ था. शिकायतकर्ता महिला उस समय उनकी अधीनस्थ कर्मचारी थी. आरोप है कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए महिला के साथ यौन अपराध किया. बाद में पीड़िता द्वारा बड़वानी में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

 किन धाराओं में हुई सुनवाई

पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था. लंबी सुनवाई और सबूतों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाया. न्यायालय ने कहा कि पद का दुरुपयोग कर अधीनस्थ महिला के साथ किया गया अपराध अत्यंत गंभीर है और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

 सज़ा और जुर्माना

अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ-साथ एक अन्य धारा में 1 वर्ष की अतिरिक्त सज़ा सुनाई. साथ ही 1,01,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त सज़ा का प्रावधान भी रखा गया है.

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इस फैसले को पद पर बैठे अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि अधिकारों का दुरुपयोग कर किए गए अपराधों पर न्यायपालिका सख्त रुख अपनाती है. पीड़िता को न्याय मिलने के बाद अब यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

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