Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति से जुड़े क्या है रोचक तथ्य, आप भी जानिए यहां

Makar Sankranti: मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग पतंग उड़ाते हैं और तिल-गुड़ (Til-Gud) खाकर इस पर्व को मनाते हैं. हम आपको मकर संक्रांति (Makar Sankranti Facts) से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य बताने जा रहे हैं जिसकी जानकारी पंडित दुर्गेश ने दी है.

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Makar Sankranti 2024: नया साल 2024 का आगमन हो चुका है और साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति आने वाला है. मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग पतंग उड़ाते हैं और तिल-गुड़ (Til-Gud) खाकर इस पर्व को मनाते हैं. हम आपको मकर संक्रांति (Makar Sankranti Facts) से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य बताने जा रहे हैं जिसकी जानकारी पंडित दुर्गेश ने दी है.

सूर्य मकर राशि में करता है प्रवेश 
मकर संक्रांति में मकर शब्द मकर राशि को इंगित करता है. वही संक्रांति का अर्थ है संक्रमण अर्थात प्रवेश करना, मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है. एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं. चूंकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस समय को मकर संक्रांति कहा जाता है. मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. हिंदू महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है.

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फसलों के आगमन की खुशी
इस दिन से बसंत ऋतु की भी शुरुआत हो जाती है और ये त्यौहार संपूर्ण भारत में फसलों के आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है. खरीफ की फसलें कट चुकी होती है और खेतों में रबी की फसलें लहलहाती हुई बड़ी खूबसूरत नजर आती हैं. खेत में सरसों के फूल मनमोहक लगते हैं और सब को आकर्षित करते हैं.

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अलग-अलग तरीकों से मनाते हैं पर्व को
मकर संक्रांति के इस पर्व को पूरे भारत में मनाया जाता है लेकिन कुछ राज्यों में स्थानीय तरीकों से इस त्योहार को मनाया जाता है. जैसे दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है. उत्तर भारत में इसे लोहड़ी, पतंग उत्सव, खिचड़ी पर्व आदि कहा जाता है. मध्य भारत में इसे संक्रांति कहा जाता है और मकर संक्रांति को खिचड़ी, माघी, उत्तरायण इत्यादि नाम से जाना जाता है.

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तिल-गुड़ से स्वास्थ्य को लाभ
सर्दी के मौसम में आने वाले इस त्योहार को लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं. सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान कम होने के कारण शरीर में कई प्रकार के रोग और बीमारियां तुरंत होने लगती है इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने पकवान खाए जाते हैं और बांटे भी जाते हैं. कहा जाता है कि इन्हें खाने से शरीर में गर्मी पैदा होती है और शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी तिल और गुड़ होते हैं. भारत में कई हिस्सों पर इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और प्रसाद में रेवड़ी, गजक इत्यादि बांटी जाती है.

दान-पुण्य का है विशेष महत्व
इस दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान दान पूजा इत्यादि करने से सभी पाप धुल जाते हैं और पुण्य मिलता है इसी दिन मलमास भी समाप्त होता है और शुभ माह प्रारंभ होने के कारण लोग खूब दान पुण्य करते हैं और पूरे साल सुख समृद्धि की कामना करते हैं.

सूरज की सीधी किरणें पड़ती है मकर रेखा पर
इस पर्व में भौगोलिक परिवर्तन भी देखने को मिलते हैं. इस दिन पृथ्वी साढ़े 23 डिग्री अक्ष पर झुकी हुई सूर्य की परिक्रमा करती है. वर्ष में चार स्थितियां ऐसी होती हैं जब सूरज की सीधी किरणें मकर रेखा पर पड़ती है.

पतंग उड़ाने के पीछे का कारण
पतंग उड़ाने के पीछे एक मुख्य कारण है. पहला कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना अच्छा माना जाता है चूंकि ये समय सर्दियों का होता है इसलिए इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक और त्वचा और हड्डियों के लिए भी लाभकारी होता है. उत्सव के साथ सेहत का भी लाभ मिलता है इसलिए इस दिन पतंग महोत्सव मनाया जाता है.

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