ISRO Update : भारत का 'सूर्य नमस्कार', इसरो ने रचा कीर्तिमान, PM Modi ने दी बधाई

Aditya L1 Mission : इस मिशन में अंतरिक्ष वेधशाला (space observatory) बदलते अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखेगी और वैज्ञानिकों को सौर तूफान और भड़कने सहित प्रतिकूल परिवर्तनों के बारे में चेतावनी देगी जो उपग्रहों के काम को प्रभावित कर सकते हैं. 

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ISRO Latest News : अंतरिक्ष विज्ञान के दृष्टिकोण से आज का दिन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation's) यानी इसरो (ISRO) के आदित्य-एल1 मिशन (Aditya L1 Mission) ने आज अपनी अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है. सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला मिशन (India's first mission to study the sun) श्रीहरिकोटा लॉन्चपैड (Sriharikota launchpad) से अपनी महत्वाकांक्षी यात्रा शुरू करने के चार महीने बाद आज अपने अंतिम गंतव्य कक्षा में पहुंच चुका है.

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हेलो कक्षा में किया प्रवेश

इसरो ने ट्वीट कर आदित्य-एल1 के हेलो कक्षा में प्रवेश करने की जानकारी दी है. पीएम मोदी ने भी मिशन की सफलता के लिए बधाई दी है. करीब ₹400 करोड़ की लागत से तैयार और लगभग 1,500 किलोग्राम की यह सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला के रूप में कार्य करेगी. 

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प्राप्त जानकारी के अनुसार एल1 प्वाइंट के चारों ओर हेलो कक्षा (Halo Orbit) में उपग्रह से सूर्य को लगातार देखा जा सकता है. इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव का अवलोकन करने में अधिक लाभ मिलेगा. वहीं यदि हम ऐसा नहीं करते हैं, तो संभावना है कि यह शायद सूर्य की ओर अपनी यात्रा जारी रखेगा.

बता दें कि ‘लैग्रेंज प्वाइंट' वह क्षेत्र है जहां पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण निष्क्रिय हो जाएगा. ‘हेलो' कक्षा, एल 1 , एल 2 या एल 3 ‘लैग्रेंज प्वाइंट' में से एक के पास एक आवधिक, त्रि-आयामी कक्षा है.

अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल 1) के आसपास एक ‘हेलो' कक्षा में पहुंचा है. एल1 प्वाइंट पृथ्वी और सूर्य के बीच की कुल दूरी का लगभग एक प्रतिशत है. इस मिशन में अंतरिक्ष वेधशाला (space observatory) बदलते अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखेगी और वैज्ञानिकों को सौर तूफान और भड़कने सहित प्रतिकूल परिवर्तनों के बारे में चेतावनी देगी जो उपग्रहों के काम को प्रभावित कर सकते हैं. 

सात पेलोड ले जाने वाला आदित्य-एल1 उपग्रह विद्युत चुम्बकीय, कण और चुंबकीय क्षेत्र डिटेक्टरों का उपयोग करके फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों (कोरोना) को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिक प्रयोग भी करेगा.

यह मिशन कम अध्ययन किए गए सौर मौसम के अलावा, उपग्रह प्री-फ्लेयर और फ्लेयर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेगा.

इसरो के अध्यक्ष (ISRO Chairman) एस सोमनाथ (S Somnath) ने एनडीटीवी (NDTV) को बताते हुए कहा था कि "चूंकि आदित्य-एल1 लगातार सूर्य को ऑब्जर्व करेगा. इसलिए यह हमें पृथ्वी पर आसन्न सौर विद्युत-चुंबकीय प्रभावों के बारे में चेतावनी दे सकता है. यह हमारे उपग्रहों (Satelites) और संचार नेटवर्क को बाधित होने से बचा सकता है.

इसरो अध्यक्ष सोमनाथ ने कहा था कि भारत के पास अंतरिक्ष में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है, जिसमें 50 से अधिक परिचालन उपग्रह भी शामिल हैं, जिन्हें सूर्य के प्रकोप से बचाने की आवश्यकता है.

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सौर वातावरण में गतिशीलता, सूर्य के परिमंडल की गर्मी, सूर्य की सतह पर सौर भूकंप या ‘कोरोनल मास इजेक्शन' (सीएमई), सूर्य के धधकने संबंधी गतिविधियों और उनकी विशेषताओं तथा पृथ्वी के करीब अंतरिक्ष में मौसम संबंधी समस्याओं को समझना है.

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