RTE Admission 2026-27: अब गरीब का बच्चा भी पढ़ेगा; इस सत्र से छत्तीसगढ़ में RTE की सीटें बढ़ीं, नए नियम जारी

RTE Admission 2026-27: आरटीई सीटों के गलत प्रकटीकरण पर रोक लगने से कुछ बड़े और छोटे निजी स्कूलों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है. स्कूलों का कहना है कि नई व्यवस्था से उनके संचालन पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन सरकार स्पष्ट है कि यह निर्णय कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के हित में है.

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RTE Admission 2026-27: अब गरीब का बच्चा भी पढ़ेगा; इस सत्र से छत्तीसगढ़ में RTE की सीटें बढ़ीं, नए नियम जारी

RTE Admission 2026-27: छत्तीसगढ़ सरकार ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE Act) 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से केवल कक्षा पहली को ही प्रवेश कक्षा (Entry Point) घोषित कर दिया है. सरकार का मानना है कि इस निर्णय से आरटीई (Right To Education) सीटों (Chhattisgarh RTE Portal Seats) के प्रकटीकरण में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगेगी और आर्थिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्ग के बच्चों को अधिनियम का वास्तविक लाभ मिल सकेगा.

RTE Admission 2026-27: छत्तीसगढ़ में आरटीई सीटों में वृद्धि
Photo Credit: Ajay Kumar Patel

पहले क्या था नियम?

पहले की व्यवस्था में नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली, तीनों को प्रवेश कक्षा माना जाता था. यही लचीलापन कई निजी स्कूलों द्वारा गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा था. बड़ी और नामी प्राइवेट स्कूल नर्सरी को प्रवेश बिंदु बताकर उसकी क्षमता कम दर्शाती थीं. इसी आधार पर वे सिर्फ उतनी ही 25% RTE सीटें घोषित करती थीं. जबकि वास्तविकता में वही स्कूल कक्षा पहली में 4-5 सेक्शन चलाते थे और बड़ी संख्या में सामान्य छात्रों को प्रवेश देते थे.

इसका परिणाम यह हुआ कि वास्तविक क्षमता के अनुसार RTE सीटें घोषित ही नहीं होती थीं, जिससे कमजोर वर्ग के बच्चों को उचित लाभ नहीं मिल पाता था.

दूसरी ओर कुछ छोटे स्कूल, नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली में से दो कक्षाओं को प्रवेश कक्षा घोषित कर देते थे. अपनी वास्तविक क्षमता से अधिक सीटें दिखाकर अधिक RTE प्रवेश लेते थे. ऐसे स्कूल मुख्यतः सरकारी शुल्क प्रतिपूर्ति पर निर्भर रहते थे. शैक्षणिक स्तर कम होने के कारण सामान्य बच्चे स्कूल बदल देते थे जिससे इन स्कूलों में RTE बच्चों की संख्या बढ़ जाती थी और बार-बार स्कूल बदलने से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित होती थी.

RTE के लिए सिर्फ कक्षा पहली प्रवेश बिंदु; कैसे बदलेगी व्यवस्था?

सरकार के नए निर्णय के तहत अब RTE सीटों का निर्धारण UDISE पोर्टल पर दर्ज पिछली कक्षा पहली की प्रविष्ट संख्या के आधार पर होगा. स्कूलों द्वारा दी जाने वाली गलत या भ्रामक जानकारी पर नियंत्रण होगा. स्तरहीन स्कूलों के संचालन पर कसने लगेगी लगाम. शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी.

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RTE सीटों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

नए नियमों का असर तुरंत दिखने लगा है. पिछले वर्ष कक्षा पहली में 9375 RTE सीटें घोषित हुई थीं. वर्ष 2026-27 के लिए यह बढ़कर 19,489 सीटें हो गई हैं. इसके अलावा वर्ष 2025-26 में निजी स्कूलों में RTE अंतर्गत 35,335 बच्चे केजी-2 में अध्ययनरत थे. ये सभी 2026-27 में कक्षा पहली में प्रवेश करेंगे. इस प्रकार आगामी सत्र में कक्षा पहली में कुल 54,824 बच्चों को प्रवेश मिलेगा, जो पिछले वर्ष की 53,325 RTE सीटों से भी अधिक है. यह वृद्धि शासन की पारदर्शी नीति का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है.

निजी स्कूलों की नाराज़गी

आरटीई सीटों के गलत प्रकटीकरण पर रोक लगने से कुछ बड़े और छोटे निजी स्कूलों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है. स्कूलों का कहना है कि नई व्यवस्था से उनके संचालन पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन सरकार स्पष्ट है कि यह निर्णय कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के हित में है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच बढ़ाने के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है. सरकार का मानना है कि यह कदम शिक्षा के अधिकार को वास्तविक अर्थों में लागू करने, सभी को समान अवसर देने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है.

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