एक साथ गूंजेगा वन्देमातरम, रायपुर से बलौदा बाजार तक 5 लाख विद्यार्थी रचेंगे इतिहास, हेलीकॉप्टर से बरसेंगे फूल 

Vande Mataram 150th Anniversary: वन्देमातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर छत्तीसगढ के शासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों में सामूहिक वन्देमातरम गान का आयोजन किया जाएगा. मुख्य कार्यक्रम रायपुर के सुभाष स्टेडियम में होगा.  

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Vande Mataram 150th Anniversary: छत्तीसगढ़ संस्थानों में में होगा बड़ा आयोजन.

Vande Mataram Anniversary: वन्देमातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रायपुर, बलौदा बाजार और भाटापारा जिले के सभी शासकीय व निजी शिक्षण संस्थानों में एक साथ सामूहिक वन्देमातरम गान का ऐतिहासिक आयोजन किया जाएगा. इस आयोजन की तैयारियों को लेकर रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने संबंधित विभागों, शिक्षा संस्थानों व संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ  महत्वपूर्ण बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

सुबह 11 बजे एकत्रित होंगे विद्यार्थी 

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि रायपुर और बलौदा बाजार–भाटापारा क्षेत्र के लगभग 3000 स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में यह आयोजन होगा, जिसमें करीब 5 लाख विद्यार्थी सहभागिता करेंगे. राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां 25,000 विद्यार्थी एक साथ वन्देमातरम का सामूहिक गान करेंगे. इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी.

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उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में NCC, NSS, रेडक्रॉस और स्काउट्स एंड गाइड्स के कैडेट्स की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी. सभी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी सुबह 11 बजे एकत्रित होंगे. पहले प्रस्तावना का वाचन होगा और ठीक 12.55 बजे पूरे क्षेत्र में एक साथ वन्देमातरम गान आरंभ होगा. इसके पूर्व 11.30 से 12.30 बजे तक देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा.

राष्ट्रभक्ति की चेतना जगाने का कार्य किया

सांसद अग्रवाल ने कहा कि महान साहित्यकार एवं राष्ट्रभक्त कवि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 7 नवंबर 1875 को रचित वन्देमातरम गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जन-जन के भीतर राष्ट्रभक्ति की चेतना जगाने का कार्य किया. उसकी 150वीं वर्षगांठ और सेना दिवस जैसे गौरवपूर्ण अवसर पर यह आयोजन आज की पीढ़ी के मन में समर्पण, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को और सुदृढ़ करेगा. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक गीत का सामूहिक गायन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, सेना के सम्मान और भारत माता के प्रति अटूट श्रद्धा से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है.
 

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