करोड़ों का कारोबार छोड़ा: 3 बच्चों समेत 8 लोग वैराग्य की राह पर, आखिरी बार पहनेंगे राजसी कपड़े

Raipur Jain Family: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से जैन समाज के आठ लोग सांसारिक जीवन त्यागकर वैराग्य (Jain Diksha Mumbai) की राह पर निकल रहे हैं. ये सभी 2 फरवरी 2026 को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस (12102) से मुंबई रवाना होंगे और 8 फरवरी 2026 को दीक्षा ग्रहण करेंगे.

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दीक्षा लेने वाले शैलेंद्र संकलेचा व उनकी पत्‍नी एकता संकलेचा अपने बेटे यश व बहू भव्‍या के साथ.

Raipur Jain Family: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जैन समाज के आठ लोगों के लिए रायपुर की गलियां, घर-परिवार और धन-दौलत अब इतिहास बन जाएंगे. सभी सांसारिक जीवन का त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपना रहे हैं. ये रायपुर से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस (12102) में सवार होकर मुंबई जाएंगे, जहां 8 फरवरी 2026 को (Jain Diksha Mumbai) दीक्षा लेंगे.

2 फरवरी 2026 की सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से इनकी विदाई होगी. संयम मनोरथ उत्सव परिवार रायपुर की ओर से स्टेशन पर भव्य विदाई समारोह रखा गया है.  

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Mumukshu Diksha from Raipur: दीक्षार्थियों को विदाई देगा रायपुर जैन समाज

NDTV से बातचीत में यश संकलेचा ने बताया कि रायपुर के अलग-अलग परिवारों से जुड़े इन आठ दीक्षार्थियों में उनकी माता एकता संकलेचा (47) और पिता शैलेंद्र संकलेचा (49) भी शामिल हैं. सभी दीक्षार्थियों को विदा करने के लिए रायपुर का पूरा जैन समाज रेलवे स्टेशन पर मौजूद रहेगा. इस मौके पर दीक्षार्थी आखिरी बार राजशाही वस्त्रों में नजर आएंगे.

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Jain Diksha Mumbai: मुंबई में संयमरंग उत्सव, देशभर से 64 मुमुक्ष

दीक्षा से पहले 25-26 जनवरी 2026 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में विदाई समारोह आयोजित किया गया था. इसके बाद 8 फरवरी 2026 को मुंबई के बोरीवली में संयमरंग उत्सव होगा, जहां रायपुर के इन 8 सदस्यों के साथ देशभर से कुल 64 मुमुक्ष दीक्षा लेंगे.  

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रायपुर के आठ दीक्षार्थी

  1. शैलेंद्र संकलेचा-उम्र 49 साल
  2. एकता संकलेचा-उम्र 47 साल
  3. आशीष सुराना-उम्र 42 साल
  4. रितु सुराना-उम्र 40 साल
  5. आर्यन सुराना-उम्र 16 साल
  6. आरुष सुराना-उम्र 14 साल
  7. तनिष सोनिगरा-उम्र 13 साल
  8. सुरभि बंसाली-उम्र 26 साल 

किसी ने बिजनेस छोड़ा, किसी ने सपनों का संसार

यश संकलेचा ने बताया कि उनके पिता शैलेंद्र संकलेचा रायपुर में कपड़े का बड़ा व्यवसाय करते थे, जिसे वे परिवार को सौंपकर संयम मार्ग अपना रहे हैं. आम्रपाली सोसायटी निवासी आशीष सुराणा ने अपना होलसेल बैग बिजनेस छोड़ा और पत्नी रितु सुराणा तथा दोनों बेटों आर्यन और आरुष के साथ मुमुक्ष बनने का निर्णय लिया. 

26 वर्षीय सुरभि बंसाली ने फूड टेक्नोलॉजी में मास्टर्स करने के बाद वैराग्य का मार्ग चुना. दुनिया घूमने का सपना देखने वाली सुरभि ने चातुर्मास के बाद सांसारिक जीवन त्यागकर साध्वी बनने का संकल्प लिया.

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