छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 जुलाई को बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुए उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस ने सख्त कानूनी कार्रवाई की है. पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव और हिंसक झड़प में ड्यूटी पर तैनात 16 पुलिस जवान घायल हो गए है.जिसके बाद पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का आरोप है कि बैरिकेडिंग के पास जमा भीड़ की तरफ से कांच की बोतलें, पत्थर और डंडे फेंके गए, जिससे कानून-व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को गंभीर चोटें आईं.
कांग्रेस का कड़ा रुख, पुलिस को दी चेतावनी
इधर, पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को लेकर कांग्रेस का रुख भी आक्रामक हो गया है. छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस नेताओं ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि प्रदेश में भविष्य में अपनी सरकार आने पर इस एकतरफा कार्रवाई का पूरा हिसाब लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को 'देख लिया जाएगा'.
बीजेपी का पलटवार: 'मर्यादाओं के खिलाफ राजनीति'
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ बीजेपी ने पुलिस की इस कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराया है. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी के समर्थन में जिस तरह की हिंसक और उग्र राजनीति की जा रही है, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बिल्कुल खिलाफ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उपद्रव करने वालों और सरकारी संपत्ति व जवानों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है.
सियासी तल्खी बढ़ी, पुलिस की जांच जारी
इस पूरी घटना और केस दर्ज होने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है. वहीं, दोनों ही दल अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं, जिससे साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में और गर्माने वाला है.
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