Mid Day Meal: पोषण शक्ति योजना के आदेश जारी; फिर क्यों बालोद में बच्चों की थाली खाली; टिफिन लाना मजबूरी

Mid Day Meal Scheme: प्रशासन की चुनौती यह है कि क्या विभाग हड़ताल खत्म होने तक बच्चों को भोजन के बिना छोड़ देगा? या वैकल्पिक व्यवस्था को तत्काल लागू करेगा? फिलहाल बच्चों के पोषण, उनकी उपस्थिति और सीखने की प्रक्रिया पर इसका बुरा असर साफ दिखाई दे रहा है.

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Mid Day Meal: पोषण शक्ति योजना के आदेश जारी; फिर क्यों बालोद में बच्चों की थाली खाली; टिफिन लाना मजबूरी

Mid Day Meal: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (PM Poshan Shakti Nirman Scheme) पहले मिड-डे मील को लेकर सरकार लगातार बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है. बालोद (Balod) जिले में पिछले करीब 40 दिनों से प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना पूरी तरह ठप है. रसोइयों की जारी हड़ताल और वैकल्पिक व्यवस्था की अनुपस्थिति ने हजारों बच्चों की थाली खाली छोड़ दी है.

40 दिन से चूल्हा बंद, बच्चे टिफिन लाने को मजबूर

जिले के सरकारी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में तैनात मिड-डे मील रसोइये अपनी मांगों को लेकर 29 दिसंबर से रायपुर में हड़ताल पर हैं. इस हड़ताल का सीधा असर बच्चों पर पड़ा है. कई स्कूलों में डेढ़ महीने से चूल्हा तक नहीं जला है.
स्थिति यह है कि बच्चे या तो घर से टिफिन लाकर पढ़ाई कर रहे हैं या भोजन के लिए घर लौटने को मजबूर हैं. इससे उनकी पढ़ाई और उपस्थिति दोनों प्रभावित हो रही हैं. प्रधानपाठकों का कहना है कि उन्हें वैकल्पिक भोजन व्यवस्था के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला है.

सरकार के वैकल्पिक व्यवस्था के दावे जमीनी स्तर पर फेल

स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने 29 जनवरी को सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि रसोइयों की हड़ताल के बावजूद मध्यान्ह भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए. लेकिन बालोद जिला प्रशासन इस आदेश को लागू करने में पूरी तरह विफल दिखाई दे रहा है. उधर जिला शिक्षा अधिकारी दावा कर रहे हैं कि “कई स्कूलों में मिड-डे मील सुचारू रूप से संचालित है”, लेकिन जब संचालन से जुड़े आधिकारिक आंकड़े मांगे गए तो विभाग कोई ठोस जानकारी देने से बचता नज़र आया.

बच्चों का पोषण स्तर खतरे में, योजना की उपयोगिता पर सवाल

मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण कम करना, स्कूल उपस्थिति बढ़ाना तथा पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कराना है. लेकिन 40 दिन से मिड-डे मील बंद रहने से इन उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं, जिनके लिए यह भोजन दिन का सबसे पौष्टिक भोजन होता है. इस लंबी बाधा ने पोषण शक्ति योजना की कार्यान्वयन क्षमता पर सवाल लगा दिए हैं.

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रसोइयों की हड़ताल जारी, समाधान अधर में

रसोइये अपनी कई मांगों जैसे- विश्वसनीय मानदेय, बीमा, और कार्यस्थल सुविधाओं आदि को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. हड़ताल समाप्त होने के संकेत नहीं दिख रहे.

प्रशासन की चुनौती यह है कि क्या विभाग हड़ताल खत्म होने तक बच्चों को भोजन के बिना छोड़ देगा? या वैकल्पिक व्यवस्था को तत्काल लागू करेगा? फिलहाल बच्चों के पोषण, उनकी उपस्थिति और सीखने की प्रक्रिया पर इसका बुरा असर साफ दिखाई दे रहा है.

सरकारी दावे और जमीनी सच्चाई के बीच की खाई बच्चों के हितों पर सीधा प्रहार कर रही है. जब तक स्कूल शिक्षा विभाग प्रभावी और तुरंत लागू होने वाली वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाता, तब तक पोषण शक्ति योजना कागजों में ही दम तोड़ती दिखाई देगी.

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