6वीं-7वीं शताब्दी का यह शिव मंदिर वास्तुकला से लेकर रहस्यमयी इतिहास के लिए है प्रसिद्ध, जानिए इसकी विशेषता

Maha Shivratri 2025: मल्हार का यह शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, कला और संस्कृति का अनमोल खजाना है. इसकी स्थापत्य शैली, दुर्लभ मूर्तियां और रहस्यमयी कथाएँ इसे विशेष बनाती है. इतिहास और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान अवश्य देखने योग्य है.

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Maha Shivratri 2025 Pataleshwar Mahadev Malhar Mandir: रहस्यों का खजाना है ये शिव मंदिर

Maha Shivratri 2025 Pataleshwar Mahadev Mandir: छत्तीसगढ़ ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर मल्हार (Malhar) प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक महत्व के कारण प्रसिद्ध है. इस स्थान पर स्थित एक शिव मंदिर (Shiv Mandir) अपनी अनूठी वास्तुकला, अद्भुत मूर्तिकला और रहस्यमय इतिहास के चलते विशेष रूप से चर्चित है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण छठी-सातवीं शताब्दी में हुआ था. मंदिर की संरचना और इससे जुड़ी कथाएं इसे श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती हैं.

सोमवंशी शासकों की स्थापत्य कला का प्रदर्शन

यह प्राचीन मंदिर पश्चिम दिशा की ओर मुख किए हुए है और इसके गर्भगृह में जलहरी स्थापित है, जो इसे भगवान शिव को समर्पित सिद्ध करता है. मंदिर के मुख्य द्वार पर गंगा और यमुना की सुंदर मूर्तियाँ उकेरी गई हैं. मंदिर के अंदर शिव के गणों की विभिन्न मुद्राओं में उकेरी गई प्रतिमाएं भी देखने को मिलती हैं. विशाल पत्थरों से निर्मित यह मंदिर उस काल की उत्कृष्ट शिल्पकला को दर्शाता है और सोमवंशी शासकों की स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है.

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Maha Shivratri 2025: रहस्यमयी शिवलिंग

रहस्य से घिरा शिवलिंग

1979 से 1982 के दौरान भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस स्थान की खुदाई करवाई थी. खुदाई के दौरान स्थानीय निवासियों का दावा था कि पंचरत्न से निर्मित एक चमकता हुआ शिवलिंग देखा गया था. लेकिन खुदाई रोकने के बाद जब अगले दिन इसे दोबारा शुरू किया गया, तो वहाँ सिर्फ जलहरी ही रह गई और शिवलिंग गायब हो गया. इस रहस्यमय घटना के कारण यह मंदिर "बिना शिवलिंग वाला मंदिर" के नाम से भी प्रसिद्ध हो गया.

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Maha Shivratri 2025: बिना शिवलिंग वाला मंदिर

पुरातत्वीय खोज और प्राचीन मूर्तियां

मंदिर की खुदाई के दौरान अनेक दुर्लभ मूर्तियाँ और शिलालेख मिले, जो इसकी प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं. मंदिर के दक्षिण भाग में गरुड़ पर विराजमान भगवान विष्णु और लक्ष्मीनारायण की मूर्तियाँ स्थापित हैं. वहीं, पश्चिम भाग में रति और प्रीति के साथ कामदेव की सुंदर प्रतिमा मौजूद है. इसके अलावा, शिव विवाह, उमा-महेश्वर के अलंकरण और अन्य धार्मिक प्रतिमाएँ भी यहाँ देखी जा सकती हैं.

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संरक्षण और पर्यटकों के लिए आकर्षण

भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा इस मंदिर परिसर को एक सुंदर उद्यान के रूप में विकसित किया गया है. हरियाली, रंग-बिरंगे फूलों और प्राचीन मंदिर के भव्य दृश्य का संयोजन इसे दर्शकों के लिए आकर्षक बनाता है. खासकर मानसून के समय यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता दर्शनीय होती है.

धार्मिक आस्था और मान्यता

श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. भक्तों का विश्वास है कि इस मंदिर में जल चढ़ाने से उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं.

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