Baloda Bazar Khatiyapati Murder Case: बलौदाबाजार (Baloda Bazar) में खटियापाटी हत्या मामले (Khatiyapati Murder Case) के तीन महीने बाद पुलिस (Police) की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है. काउंटर केस की ताज़ा जांच और हिरासत में लिए गए लोगों के विरोध में शुक्रवार को पुरानी बस्ती क्षेत्र के दर्जनों लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर “निर्दोषों को फंसाने” और “पीड़ित पक्ष को आरोपी बनाने की कोशिश” का आरोप लगाया. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की.
क्या है मामला?
17 अक्टूबर 2025 को खटियापाटी में दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद चाकू से हमला हुआ था, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी. पुलिस ने तब छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था. अब काउंटर केस में पुरानी बस्ती के लोगों को हिरासत में लिए जाने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
पार्षद लोकेश कुमार चेलक और गौतम चौहान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना वारंट कई घरों में सुबह-सुबह दबिश दी और लोगों को उठाकर ले गई. परिजनों को घंटों तक किसी भी जानकारी से वंचित रखा गया. दोनों पार्षदों ने इस कार्रवाई को “दुर्भावनापूर्ण और जानबूझकर की गई कोशिश” बताया.
पुलिस का क्या कहना है?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने कहा कि “पुलिस ने 307 के मामले में की गई जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया है. घटना में षड्यंत्र की भूमिका सामने आई है, इसलिए कार्रवाई की गई है.”
प्रदर्शन में शामिल लोगों के आरोप
पार्षद गौतम चौहान ने कहा कि गणपति निधि के घर से उसके भाई को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके भाई ने ही घटना की सूचना पुलिस को दी थी और मौके पर पुलिस की मदद भी की थी. “उसकी गलती बस इतनी थी कि उसने हत्या के आरोपी को फोन कर मारपीट नहीं करने की सलाह दी थी.” जीत मनहरे ने बताया कि “मेरे बेटे को बिना किसी पूर्व जानकारी के पुलिस घर से उठा ले गई. हम जानकारी मांग रहे हैं लेकिन अब तक कोई बताने को तैयार नहीं है.” पूनम शायर बोलीं कि “मेरे पति को सुबह पुलिस ने गिरफ्तार किया है, लेकिन इसके पीछे का कारण हमें नहीं बताया जा रहा.” वहीं लखनी शायर ने बताया कि “मेरे बेटे की हत्या हुई थी, अब पुलिस मेरे दो और बेटों को उठा ले गई है.”
तनाव बरकरार
इस मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पुलिस “दबाव में” कार्रवाई न करे और पीड़ित परिवार को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए. उधर पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच जारी है और सभी तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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