Naxalite Usha Didi News: बन्दूक की नली से निकलने वाली गोलियां कभी किसी का घर नहीं बसातीं—सिर्फ उजाड़ती हैं. यही सच आज छत्तीसगढ़ के धमतरी, गरियाबंद और नुवापाड़ा के घने जंगलों में गूंज रहा है. लगातार चल रहे ऑपरेशनों और मुठभेड़ों में एक के बाद एक नक्सलियों के मारे जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे संगठन में ही नहीं, उनके परिवारों में भी भय और बेचैनी बढ़ गई है.
इसी बीच तेलंगाना के एक सुदूर गांव से उठी एक मां की करुणा भरी पुकार हर किसी का दिल को झकझोर रही है. यह आवाज है उस बूढ़ी मां की, जिसकी बेटी ऊषा दीदी इस वक्त भले ही नक्सल संगठन में बड़ी लीडर मानी जाती हो, लेकिन अपनी जड़ों और परिवार से बहुत दूर निकल चुकी है. लेकिन, परिवार के लोग आज भी उसे याद कर भावुक हो जाते हैं. यही वजह है कि एक के बाद एक मारे जा रहे नक्सलियों की खबर के बाद अब परिवार में दहशत का माहौल है.
“हथियार छोड़ो, वापस लौट आओ”
तेलंगाना के सैंड्रावेली (वेलापल्ली) गांव की गलियों में आज भी एक बुजुर्ग महिला हर आहट पर दरवाजे की ओर देखती है. यह आंखें मल्लाम की हैं, जो 8 लाख की इनामी महिला नक्सली ऊषा दीदी की मां हैं. घर के भीतर अब पहले जैसी रौनक नहीं रही. पिता की मृत्यु के बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ और यादों का दर्द बढ़ गया है. मगर इन सबसे बड़ा दर्द है—बेटी की सलामती की चिंता. लिहाजा, परिजन चाहते हैं कि ऊषा हिंसा का रास्ता छोड़ दे और जीवित घर लौट आए. मां के साथ-साथ उषा के भाई आबूला गंगैया और भाभी ने भी नम आंखों से अपील की है—अब बहुत हो गया, वापस आ जाओ.
भाई की अपील: “तुम जहां भी हो, बस एक बार लौट आओ”
उषा के भाई गंगैया की आवाज में दर्द और उम्मीद दोनों साफ महसूस होती हैं. वह कहते हैं “दीदी, पिता जी चले गए, लेकिन हम सब अभी जिंदा हैं. तुम्हारी राह देख रहे हैं. तुम संगठन में चाहे, जिस पद पर हो, हमारे लिए तुम वही छोटी बहन हो. हमारी ख्वाहिश है कि तुम हिंसा का रास्ता छोड़कर घर लौट आओ.
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इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर ऊषा सरेंडर करती हैं, तो परिवार उन्हें लेने खुद आएगा. भाई का कहना है कि तुम जहां भी हो, बस एक बार लौट आओ. यह वाक्य आज हर उस घर की कहानी लगने लगी है, जहां किसी का अपना जंगलों में भटक रहा है.
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