Innovation in Education: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक से शिक्षा की ऐसी मिसाल (Education News) सामने आई है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन सकती है. यहां के दो अलग‑अलग गांवों के सरकारी स्कूलों (Gariaband Government School) में कार्यरत शिक्षकों (Inspirational Teachers) ने अपने जुनून और समर्पण से न सिर्फ स्कूलों की सूरत बदली, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था (Rural Education Model) की छवि को भी नई पहचान दी है. कोसमी और पिपराही गांव के इन स्कूलों (Government School) में जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं, वे किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं हैं.
Gariaband Government School: कोसमी स्कूल
कोसमी स्कूल: पेंटिंग, स्मार्ट क्लास और अंग्रेजी की उड़ान
छुरा ब्लॉक के कोसमी प्राथमिक स्कूल की दीवारें आज रंग‑बिरंगी पेंटिंग्स से सजी हैं. स्कूल में स्मार्ट क्लास की सुविधा है, जहां टीवी के माध्यम से बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाया जा रहा है. यह सब संभव हुआ है स्कूल के प्रधान पाठक हेमलाल ध्रुव के निजी प्रयासों से.
Gariaband Government School: स्कूल की दीवारों में पेंटिंग
हेमलाल ध्रुव ने स्कूल की कायापलट के लिए अपनी जेब से करीब ढाई लाख रुपये खर्च किए हैं. उन्होंने न केवल स्कूल का भौतिक स्वरूप बदला, बल्कि पढ़ाई के स्तर को भी नई ऊंचाई दी है. यहां बच्चे हिंदी के साथ‑साथ अंग्रेजी में भी निपुण हो रहे हैं. चौथी‑पांचवीं कक्षा के बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते नजर आते हैं, जो ग्रामीण सरकारी स्कूल के लिए असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है.
Gariaband Government School: शिक्षक पढ़ाते हुए
पढ़ाई के साथ सेहत पर भी पूरा ध्यान
कोसमी स्कूल में शिक्षा के साथ‑साथ बच्चों की सेहत को भी प्राथमिकता दी जाती है. प्रधान पाठक हेमलाल ध्रुव खुद बच्चों के मिड‑डे मील की गुणवत्ता पर नजर रखते हैं. सप्ताहवार मेनू के अनुसार पौष्टिक भोजन मिले, यह वे स्वयं सुनिश्चित करते हैं. उनका मानना है कि स्वस्थ बच्चा ही बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकता है.
Gariaband Government School: पिपराही स्कूल
पिपराही स्कूल: जहां शिक्षक ही परिवार बन गया
इसी छुरा ब्लॉक का दूसरा उदाहरण है पिपराही गांव का प्राथमिक स्कूल, जहां प्रधान पाठिका मोहनी गोस्वामी पिछले 28 वर्षों से सेवा दे रही हैं. बच्चों के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा है कि उन्होंने अपने ससुराल और मायके दोनों को छोड़कर स्कूल के ठीक सामने ही अपना घर बना लिया. स्कूल समय के बाद भी मोहनी गोस्वामी का घर बच्चों के लिए खुला रहता है. कई बार बच्चे यहां पढ़ाई के साथ‑साथ भोजन भी कर लेते हैं. गांव के बच्चे उन्हें सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक के रूप में देखते हैं.
Gariaband Government School: शिक्षिका पढ़ाते हुए
नवाचार और खेलकूद से सीखने की नई राह
पिपराही स्कूल में पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. मोहनी गोस्वामी बच्चों को नवाचार और खेलकूद से भी जोड़ती हैं. बच्चों ने खुद पाइप का जुगाड़ कर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम तैयार किया है, जो उनके तकनीकी कौशल को दर्शाता है.
Gariaband Government School: बच्चे डांस करते हुए
इसके अलावा बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए यहां डांस प्रतियोगिता, फैशन शो और खेलकूद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे ग्रामीण परिवेश के बच्चे भी अपनी प्रतिभा खुलकर दिखा पा रहे हैं.
इच्छाशक्ति हो तो बदल सकती है तस्वीर
कोसमी और पिपराही के ये दोनों शिक्षक यह साबित कर रहे हैं कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सरकारी स्कूलों में भी प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों जैसी गुणवत्ता, अनुशासन और चमक लाई जा सकती है. ये स्कूल आज सिर्फ शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि बदलाव की मिसाल बन चुके हैं.
यह भी पढ़ें : MP RTE Admission 2026: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन शुरू; पहले दिन 22 हजार आवेदन
यह भी पढ़ें : PM Kisan Yojana: 22वीं किस्त जारी; छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़ रुपये
यह भी पढ़ें : भोपाल गोमांस तस्करी केस; असलम कुरैशी की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने ये कहा
यह भी पढ़ें : घरेलू गैस किल्लत को लेकर इंदौर में कांग्रेस का प्रदर्शन; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, CM ने कहा- अफवाह से बचें