Chhattisgarh: मूर्तियां को हटाने पर SECL अफसरों की मुश्किलें बढ़ीं, हाई कोर्ट में देना होगा इसका जवाब

Chhattisgarh News : एसईसीएल ने प्राचीन सती मंदिर से मूर्तियां हटाने की खबर जब स्थानीय निवासियों को मिली तो मामले ने जोर पकड़ लिया. इसके बाद सती मंदिर स्थल पर एसईसीएल का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई. इसके बाद नवंबर से लेकर आज तक मंदिर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है. 

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MCB News : छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के चिरमिरी में स्थित 14वीं शताब्दी के प्राचीन सती मंदिर की मूर्तियां हटाने के बाद SECL के अधिकारियों की मुश्किलें अब बढ़ती दिख रही है. मंदिर में रखी गई सदियों पुरानी मूर्तियों को हटाने के बाद चिरमिरी के RTI कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने SECL के पांच बड़े अधिकारियों को नोटिस भेजा है.

ये है पूरा मामला 

दरअसल चिरमिरी के बरतूंगा में स्थित इस प्राचीन मंदिर को संरक्षित करने के लिए जनहित याचिका लगाई गई थी. हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए मंदिर की प्राचीन मूर्तियों को संरक्षित करने का आदेश दिया था. इसके कुछ ही दिन बाद SECLने मंदिर से मूर्तियों को हटवाकर इलाके के एक पुराने बिल्डिंग में रखवा दिया. एसईसीएल के द्वारा गलत तरीके से मूर्तियों को हटाने के बाद स्थानीय लोगों ने SECLके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. 11 नवंबर के बाद से मंदिर में ही अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है. इसके कुछ ही दिन बाद चिरमिरी के आरटीआई कार्यकर्ता और पेटीशनर इन पर्सन राजकुमार मिश्रा ने एसईसीएल के अधिकारियों को कोर्ट की अवमानना का नोटिस भेजा है. मामले में राजकुमार मिश्रा का कहना है कि SECL के अधिकारियों ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने के साथ ही हाई कोर्ट के आदेश की भी अवमानना की है संबल और फावड़ा जैसे औजारों से मूर्तियों को उखाड़ा और तोड़ा गया है. एसईसीएल के वकील रमेश चंद्र सिंह के द्वारा नोटिस का जवाब दे दिया गया है. बताया जा रहा है कि जल्द ही एसईसीएल के इन अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट याचिका लग सकती है.

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जानिए क्यों भड़की धार्मिक भावनाएं

जानकारी के अनुसार जिस क्षेत्र में प्राचीन सती मंदिर स्थित है उसी क्षेत्र में कोयले के उत्खनन के लिए SECL ने मंदिर विस्थापित करने की मांग रखी थी. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को बनाए रखते हुए पुरातात्विक मूर्तियों के संरक्षण का आदेश दिया था. हाई कोर्ट के आदेश के बाद एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र के अधिकारियों ने चिरमिरी के बरतुंगा स्थित प्राचीन मां सती मंदिर के शिलालेख और मूर्तियों को कर्मचारियों की सहायता से मंदिर से विस्थापित कर सालों से बंद आजाद नगर के डिस्पेंसरी भवन में रखवा दिया. 

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एसडीएम ने दर्ज कराई थी FIR

सती मंदिर से मूर्तियां हटाने के बाद स्थानीय लोगों ने SDM से इसकी शिकायत की थी. मामले को जोर पकड़ता देख एसडीएम ने एसईसीएल के दो सब एरिया मैनेजर और एक कर्मचारी को नोटिस भेजा था. इसके कुछ ही समय बाद चिरमिरी थाने में एसडीएम चिरमिरी दिनेश मरकाम ने एसईसीएल के सब एरिया मैनेजर ओपन कास्ट प्रोजेक्ट मनीष सिंह और एसईसीएल कर्मचारी राजेश्वर श्रीवास्तव पर लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए IPC की धारा 295 ए के तहत गैर जमानती अपराध दर्ज कर दिया. मामले में SDM ने भी माना था कि SECL कर्मचारियों ने एसडीएम की अनुपस्थिति में अपनी मर्जी से सती माता मंदिर की प्राचीन मूर्तियों को हटाकर SECL की बिल्डिंग में रख दिया था. हालांकि एसईसीएल के अधिकारी अग्रिम जमानत पर है.

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    जवाब अलग-अलग

    प्राचीन मूर्तियों को हटाने के बाद एसईसीएल के अधिकारियों पर SDM दिनेश मरकाम ने गैर जमानती धारा में FIR दर्ज कराया है. जिसमें बताया गया है कि SDM की अनुपस्थिति में अपनी मर्जी से ही एसईसीएल ने मूर्तियों को हटवाया है. लेकिन एसईसीएल के वकील द्वारा दिए गए नोटिस के जवाब में बताया गया है कि जब मूर्तियां हटाई जा रही थी तब एसडीएम भी पुलिस के साथ मौजूद थे.  मामले में प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों पर ही लीपा पोती कर मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं. जानकारी के अनुसार एसईसीएल के वकील रमेश चंद्र सिंह हाल ही में विधानसभा चुनाव में खड़े हुए थे चिरमिरी से समर्थन में मिली कमी के कारण भी इनके द्वारा चिरमिरी में कई विकास कार्यों पर स्टे लगवाने की बात बताई जा रही है.

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