छत्तीसगढ़ में संत रविदास को लेकर बीजेपी संगठन और राज्य सरकार एक-दूसरे के साथ कदम-ताल मिलाते नजर आ रहे हैं. बीजेपी एक ओर जहां संत रविदास कलश वंदन यात्रा निकाल रही है. वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साल 2027 में संत रविदास जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का ऐलान किया है. इसे लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति गरमा गई है. यूपी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति बताया है.
बीजेपी सरकार के बड़े ऐलान और कलश यात्रा
बीजेपी प्रदेश भर में 'संत रविदास कलश वंदन यात्रा' निकाल रही है, जिसके लिए विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से मिट्टी लाई गई है. वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वर्ष 2027 में संत रविदास जी की 650वीं जयंती पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने, उस दिन मांस-मदिरा की बिक्री पर बैन लगाने और नया रायपुर में एक चौक का नाम संत रविदास के नाम पर रखने की बड़ी घोषणा की है. इसके अलावा उनके नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार भी शुरू किया जाएगा.
कांग्रेस का हमला: 'यूपी चुनाव के लिए दलित राजनीति'
सरकार और बीजेपी के इन फैसलों पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि बीजेपी का मकसद संत रविदास का सम्मान करना नहीं, बल्कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए दलित वोट बैंक और जातीय समीकरणों को साधना है. कांग्रेस का दावा है कि चुनाव आते ही बीजेपी इस तरह के आयोजन करके दलित वर्ग को लुभाने की कोशिश कर रही है.
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कांग्रेस को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि उनकी पार्टी सामाजिक समरसता के साथ काम करती है. उन्होंने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग और महापुरुषों के सम्मान के लिए काम कर रही है और कांग्रेस को इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए.