Chhattisgarh Hindi News: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बालोद (Balod) जिले में साढ़े 24 हजार क्विंटल से अधिक धान शार्टेज का बड़ा मामला सामने आया है. जिले के 113 खरीदी केंद्रों में 24 हजार 805.75 क्विंटल धान (Paddy) कम पाया गया है, जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ 43 लाख रुपये बनती है. धान खरीदी वर्ष 2023-24 में 113 खरीदी केंद्रों में 24 हजार 805.75 क्विंटल धान कम पाए गए हैं. यह आंकड़ा और भी बढ़ने आशंका है, क्योंकि 10 केंद्रो से 5 हजार क्विंटल से अधिक धान का उठाव किया जाना अभी बाकी है. अभी की स्थिति में 24 हजार 805 क्विंटल धान कम पाए जाने पर जिला विपणन विभाग, खाद्य एवं सीसीबी सभी सवालों के घेरे में आ गए हैं.
ये बताए जा रहे हैं शार्टेज के कारण
जब मिलर्स ने सीधे केंद्रों से धान का उठाव किया, तो शार्टेज पाई गई. शार्टेज की स्थिति पैदा होने का मुख्य कारण यह है कि समय रहते उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव नहीं किया गया. कछुआ गति से धान का उठाव किया गया. पूर्व के कस्टम मिलिंग के भुगतान को लेकर राइस मिलर्स की ओर से डीओ के लिए रिक्वेस्ट नहीं डालना ये सब शार्टेज के बड़े कारण हैं.
राशि घटा कर उन्हें दी जाएगी
वहीं, इतनी बड़ी मात्रा में धान शार्टेज होने पर जिला खाद्य अधिकारी तुलसी ठाकुर ने कहा कि 'खरीदी का 0.5 प्रतिशत शार्टेज आया है. दूसरे जिलों में तो इससे अधिक शार्टेज की स्थिति है. धान का उठाव हो जाने पर पूरी स्थिति का पता चल जाएगा. समिति को जीरो शार्टेज कर के देना है. अब समिति जाने वो कैसे करेगी..? क्योंकि जीरो शार्टेज पर 5 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि समिति को दी जाती है और अगर शार्टेज नहीं होता है, तो उनके कमीशन की राशि में जितना धान शॉर्टेज है, उसकी राशि घटा कर उन्हें दी जाएगी.'
5,291 क्विंटल धान का उठाव किया जाना शेष
बता दें कि धान खरीदी को बंद हुए महीनों बीत जाने के बाद भी जिले के खरीदी केंद्रों से 5 हजार क्विंटल से अधिक धान का उठाव नहीं किया जा सकता है. कुआगोंदी, गुजरा, भंवरमरा, भालूकोन्हा, दर्रा, खेरथा, गुदुम, कमकापर, मिर्रीटोला और गोड़ेला खरीदी केंद्र में मोटा 3 हजार 370 क्विंटल, पतला 1 हजार 790 क्विंटल और सरना 129 क्विंटल उठाव के लिए शेष है. यानी कुल 5 हजार 291 क्विंटल धान इन केंद्रों से अब तक नहीं उठाया जा सके हैं. दरअसल, छत्तीसगढ़ में अब मानसून सक्रिय हो गया है, लेकिन जिले की सोसायटियों में अब तक 5 हजार 291 क्विंटल धान पड़े हुए हैं.
वजन का घटना तय
मिलरों का कहना है कि 'सोसायटियों में रखा हुआ बहुत सा धान खराब हो चुका है. इसे उठाने में घाटा हो सकता है. सोसायटियों में अब जो धान बाकी है, उसका एक बड़ा हिस्सा खराब हो चुका है. धान में बदरा हो गया है. इससे गुणवत्तायुक्त चावल तैयार नहीं हो सकता. धान उठाने में देरी होने के कारण इसमें सूखत भी आई है. ऐसे में धान उठाने से मिलरों को वजन का घटना तय है. ऐसे में अब मानसून सक्रिय होने के बाद धान खराब होने की आशंका गहरा गई है. खरीफ सीजन 2023-24 में राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जो धान खरीदा था, उसका अधिकांश हिस्सा सोसायटियों से उठाए जा चुके हैं.'
धान उठाव का ये है नियम
सरकारी रिकॉर्ड बता रहा है कि राज्य के कई जिलों के उपार्जन केंद्रों में अब तक 64504 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान जाम है. खाद्य विभाग द्वारा बनाई गई उपार्जन नीति में कहा गया है कि सोसायटियों में धान खरीदे जाने के 72 घंटे बाद ही धान का उठाव किया जाना है. धान खरीदी के बाद महीनों बीत चुके हैं. बावजूद धान का उठाव 72 घंटे के भीतर नहीं किया जाना, जिला विपणन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा हैं.
इन जिलों में धान का स्टॉक
छत्तीसगढ़ के जिन जिलों के खरीदी केंद्रों में धान जाम है, उनमें बालोद समेत बस्तर, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव, सुकमा, बिलासपुर, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, सारंगढ़- बिलाईगढ़, बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलरामपुर, जशपुर, कोरिया, सरगुजा जिला शामिल है. बाकी के सभी सभी जिलों से धान का परिवहन हो चुका है. इस जिलों की सोसायटियों का पूरा धान राज्य के मिलरों ने कस्टम मिलिंग के लिए उठाया हैं.
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सोसायटियों को घाटा होगा..
तुलसी ठाकुर, जिला खाद्य अधिकारी, बालोद कहते हैं कि सोसायटी को जीरो शार्टेज परसेंट करना होगा, जीरो शार्टेज की स्तिथि में उन्हें 5 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि मिलती है, अगर सूखत होता है तो जितना मात्रा में धान सूखत होगा, उतनी राशि उनके कमीशन में काटी जाएगी, मार्कफेड अपना पैसा नहीं छोड़ती, जिससे सोसायटी को घाटा होगा.