Chhattisgarh News: बैकुंठपुर अस्पताल का हाल बदहाल, ब्लड बैंक में खून नहीं...मरीज परेशान

डाॅक्टर का कहना है कि रक्तदान करने कई फायदे हैं. इससे हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती है, क्योंकि रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमता. इससे खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा टल जाता है. रक्तदान से शरीर में एनर्जी आती है, क्योंकि ब्लड निकलने के बाद नए ब्लड सेल्स बनते हैं. इससे शरीर में तंदुरुस्ती आती है. लीवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है.

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Chhattisgarh News: जिला अस्पताल का हाल बदहाल, ब्लड बैंक में खून नहीं...मरीज परेशान

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बैकुंठपुर (Baikunthpur) जिला अस्पताल में 300 क्षमता वाले ब्लड बैंक में खून नहीं है. आलम ऐसा है कि 300 यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ एक यूनिट ब्लड बचा है. बताया जा रहा है कि समाज सेवियों व युवाओं की तरफ से रक्तदान में न शामिल होने से ब्लड बैंक की यह हालत हो गई है. अस्पताल स्टाफ बता रहे हैं कि कोविड तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन कोविड के बाद अस्पताल में ब्लड बैंक सिर्फ नाम का रह गया है. ब्लड नहीं मिलने से मरीज परेशान हो रहे हैं. दूसरे ब्लड ग्रुप के डोनर को लेकर पहुंचने वालों को भी मरीज के ग्रुप का ब्लड नहीं मिल रहा है. 

आपको बता दें कि जिला अस्पताल बैकुंठपुर में रोज करीब 10 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है. ब्लड बैंक में ब्लड नहीं होने से सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल, सर्जिकल डिलीवरी, ऑपरेशन और रक्त की कमी वाले रोगियों के लिए खतरा पैदा हो गया है. इमरजेंसी में मुश्किलें और बढ़ गई है. डॉक्टरों के अनुसार, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की खपत के हिसाब से एक महीने में करीब 450 यूनिट खून की जरूरत है लेकिन लोग रक्तदान करने नहीं पहुंच रहे हैं. शिविर के दौरान कुछ दिन ही ब्लड बैंक में 30 से 40 यूनिट का स्टॉक रह पाता है. 

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खून की कमी के चलते मरीजों को कर रहे रेफर 

ब्लड बैंक में खून की कमी से सड़क हादसों में गंभीर, सिकलिंग, डिलीवरी के लिए पहुंचनी वाली प्रसूताओं को खून नहीं मिल पा रहा है. इस कारण मरीजों के ऑपरेशन में मुश्किल आ रही है और उन्हें मजबूरन अंबिकापुर या बिलासपुर रेफर किया जा रहा है. लोगों को जागरूक उद्देश्य से जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय नजर नहीं आ रहा है. ब्लड बैंक के प्रभारी ने बताया, 

यदि जिले के 300 लोग हर महीने में रक्तदान करते हैं तो ब्लड बैंक से लोगों को बिना ब्लड लिए नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जा सकता है. एक स्वस्थ शरीर में 5 से 6 लीटर खून होता है. रक्तदान में सिर्फ 250 ML खून निकाला जाता है. खून निकालने के कुछ समय बाद ही शरीर उतना रक्त बना लेती है और व्यक्ति तीन महीने बाद दोबारा रक्त देने योग्य हो जाता है. 

कोरिया जिले का एकमात्र ब्लड बैंक जिला अस्पताल बैकुंठपुर में है. जिले के तमाम मरीज इसी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं. ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट है लेकिन फिलहाल इसमें सिर्फ 1 यूनिट ही ब्लड बचा है. डोनर लाने के बाद भी कई ग्रुप का ब्लड नहीं मिलने से परेशानी हो रही है. मामले में CMHO Dr. R.S.  सेंगर का कहना है कि ब्लड बैंक में खून की कमी को लेकर जल्द ही स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा. पहले जिला मुख्यालय के समाज सेवियों के साथ विभिन्न वर्गों का सहयोग मिलता था. चिरमिरी, मनेंद्रगढ़ से लोग रक्तदान करते थे. रक्तदान शिविर में कमी आई है जिस कारण ब्लड बैंक में ब्लड कम है. 

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डाॅक्टर का कहना है कि रक्तदान करने कई फायदे हैं. इससे हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती है, क्योंकि रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमता. इससे खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा टल जाता है. रक्तदान से शरीर में एनर्जी आती है, क्योंकि ब्लड निकलने के बाद नए ब्लड सेल्स बनते हैं. इससे शरीर में तंदुरुस्ती आती है. लीवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है. शरीर में ज्यादा आयरन की मात्रा लीवर पर दबाव डालती है और रक्तदान से आयरन की मात्रा बैलेंस हो जाती है. 

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