जेल जाकर शराब घोटाले के आरोपी लखमा से मिले बघेल, बोले- बिना ठोस सबूत के परेशान कर रही है जांच एजेंसियां

Chhattisgarh Sharab Ghotala: भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के पास कोई ठोस तथ्य नहीं हैं और सिर्फ परेशान करने के उद्देश्य से कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि हाल ही में तीन और लोगों को प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया है. वह भी सिर्फ उत्पीड़न के लिए.

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Chhattisgarh Liquor Scam News: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस (Congress) नेताओं और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ अलग-अलग घोटाले में जांच एजेंसियां बहुत ही सक्रियता से काम कर रही है. सत्ता पक्ष जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई को न्याय संगत बता रहे हैं. सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि किसी भी भ्रष्ट को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं, कांग्रेस पार्टी इसे जांच एजेंसियों का दुरुपयोग और विपक्ष को परेशान करने की साजिश बता रहा है.

इसी कड़ी में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूर्व आबकारी मंत्री लखमा से मिलने रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे. गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा आरोपी हैं. बेटे चैतन्य बघेल के ज़मानत पर रिहा होने के बाद वे पहली बार जेल पहुंचे थे. इस मौके पर उन्होंने जांच एजेंसियों का बीजेपी का बी टीम करार देते हुए विपक्षी नेताओं को बिना ठोस सबूत के परेशान करने का आरोप लगाया.

जेल जाकर शराब घोटाले के आरोपी लखमा से मिले बघेल
Photo Credit: AI

ठीक है लखमा का स्वास्थ्य

शराब घोटाला मामले में सेंट्रल जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि फिलहाल कवासी लखमा का स्वास्थ्य ठीक है. पिछली बार उन्हें सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखा था. इसके बाद लखमा की जांच हुई और उन्हें दवाइयां भी दी गई.

बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के पास कोई ठोस तथ्य नहीं हैं और सिर्फ परेशान करने के उद्देश्य से कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि हाल ही में तीन और लोगों को प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया है. वह भी सिर्फ उत्पीड़न के लिए.

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उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ईडी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सबमिट कर दी है, लेकिन ईओडब्ल्यू ने अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है. भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रही है और खुद को कानून से ऊपर समझ रही है.

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